
Godda News: किसी भी पिता के लिए इस दुनिया में सबसे भारी बोझ उसकी अपनी औलाद की अर्थी होती है। जिस बच्ची को बचपन में कंधों पर बिठाकर पूरी दुनिया दिखाई, जब उसी फूल जैसी बेटी को हमेशा के लिए रुखसत करने के लिए कांधा देना पड़े, तो उस दर्द को लफ्जों में बयां कर पाना नामुमकिन है। झारखंड सरकार की मंत्री और महगामा विधायक दीपिका पांडेय सिंह की बेटी तृषा सिंह के सड़क हादसे में चले जाने के बाद जब गोड्डा में उनकी अंतिम यात्रा निकली, तो वहां मौजूद हर शख्स का कलेजा फट पड़ा। बेबस पिता जब अपनी जवान बेटी की अर्थी को कांधा देकर आगे बढ़े, तो वहां खड़ा कोई भी इंसान अपने आंसुओं को रोक नहीं पाया।

बचपन के झूले से लेकर आखिरी सफर तक का दर्दनाक फासला
बेटी के दुनिया में आने से लेकर उसके बड़े होने तक, पिता हर मोड़ पर उसके साथ एक मजबूत साए की तरह खड़े रहे। जिस लाडली को उन्होंने उंगली पकड़कर चलना सिखाया और कभी धूप की तपिश तक नहीं लगने दी, आज वही बिटिया बेजान होकर हमेशा के लिए दूर जा रही थी। किसी पिता ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि जिस बच्ची को अपनी बाहों में उठाकर दुनिया की हर खुशी देने की कसमें खाई थीं, एक दिन वक्त उसी लाडली को अपने कांधों पर अंतिम सफर के लिए ले जाने को मजबूर कर देगा। यह सिर्फ एक परिवार का मातम नहीं था, बल्कि पिता और बेटी के उस अटूट रिश्ते की सबसे खामोश और दर्दनाक तस्वीर थी जिसे देखकर हर किसी का दिल बैठ गया।

गमगीन माहौल में हर आंख हुई नम, पीछे छूट गईं सिर्फ यादें
सड़क हादसे ने एक ही झटके में एक हंसते खेलते परिवार की पूरी दुनिया उजाड़ दी है। तृषा सिंह की अचानक हुई मौत के बाद से ही घर में गहरा सन्नाटा और मातम पसरा हुआ है। सांत्वना देने पहुंचे हर रिश्तेदार, समर्थक और परिचित की जुबान मानो खामोश हो चुकी है। अंतिम विदाई के पूरे रास्ते भर सिर्फ सिसकियां सुनाई दे रही थीं। एक जिंदादिल और होनहार बेटी हमेशा के लिए विदा हो गई और पीछे छोड़ गई बचपन की अनगिनत यादें, रोते बिलखते मां बाप और जिंदगी भर न भरने वाला एक गहरा जख्म।


