
Digital Desk Naxatra Samachar: किताबों के पन्नों में अपना भविष्य संवारने के बाद सुबह की ताजी हवा खाने निकले चार होनहार दोस्तों को शायद जरा भी गुमान नहीं था कि यह सफर उनकी जिंदगी का आखिरी मोड़ साबित होगा। जमशेदपुर के मरीन ड्राइव पर गुरुवार तड़के हुई इस घटना ने पूरे शहर को अंदर तक हिलाकर रख दिया है। कार्मेल जूनियर कॉलेज में 12वीं कॉमर्स के चार साथी जब रातभर ग्रुप स्टडी खत्म कर तड़के करीब साढ़े तीन बजे कार से लॉन्ग ड्राइव पर निकले, तो दोमुहानी के पास सड़क किनारे खड़े एक खराब ट्रक से उनकी कार जा टकराई। टक्कर इतनी जबर्दस्त थी कि चारों दोस्तों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जिनमें झारखंड सरकार की ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह की बेटी युविका उर्फ तृषा भी शामिल थीं।

खाली फ्लैट में रातभर की पढ़ाई, फिर अचानक बना घूमने का प्लान
बुधवार की रात चारों दोस्त मिलकर परीक्षा की तैयारी के लिए सोनारी स्थित ‘एसडीएस रेजेंसी’ फ्लैट में इकट्ठा हुए थे। यह फ्लैट सार्थक अग्रवाल का था और उनके माता पिता केदारनाथ दर्शन के लिए गए हुए थे, इसलिए घर पर कोई नहीं था। चारों ने पूरी रात साथ बैठकर पढ़ाई की और जब तड़के करीब दो बजे काम पूरा हुआ, तो दिमाग हल्का करने और ठंडी हवा लेने के ख्याल से उन्होंने मरीन ड्राइव की ओर ड्राइव पर निकलने की योजना बनाई। किसी ने सोचा भी नहीं था कि मुस्कुराते हुए घर की चौखट लांघने वाले ये बच्चे अब कभी लौटकर वापस नहीं आएंगे।

120 की रफ्तार और सड़क पर अंधेरा, संभलने का एक पल भी नहीं मिला
हादसा सुबह करीब साढ़े तीन बजे दोमुहानी के पास हुआ। बताया जा रहा है कि उस समय कार की रफ्तार लगभग 120 किलोमीटर प्रति घंटे थी। सड़क के किनारे जो ट्रक खड़ा था, वह बुधवार रात करीब 10 बजे से ही ब्रेकडाउन होकर लावारिस हालत में पड़ा हुआ था। हालांकि ट्रक चालक ने पीछे पट्टा और झंडा बांधकर संकेत देने की कोशिश जरूर की थी, लेकिन मरीन ड्राइव पर पसरे घने सन्नाटे, अंधेरे और कार की बेकाबू रफ्तार के आगे वह संकेत किसी काम न आया। चालक को समय रहते खड़ा ट्रक नजर ही नहीं आया और कार बिना ब्रेक लगे सीधे ट्रक के पिछले हिस्से में समा गई। टक्कर से कार के परखच्चे उड़ गए और 17 वर्षीय वंशिका खंडेलवाल, 18 वर्षीय युविका सिंह, 17 वर्षीय नमन गुप्ता और 18 वर्षीय सार्थक अग्रवाल की सांसें मौके पर ही थम गईं।
नाम का मरीन ड्राइव, न जलती हैं लाइटें और न भरते हैं गड्ढे
चार होनहार बच्चों की असमय मौत के बाद स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है और शहर की इस वीआईपी सड़क के रखरखाव पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय बाशिंदों का कहना है कि प्रशासन ने बड़े शौक से इस रास्ते का नाम ‘मरीन ड्राइव’ तो रख दिया, लेकिन असलियत यह है कि यहां की स्ट्रीट लाइटें अक्सर बंद पड़ी रहती हैं और सड़क पर जगह जगह जानलेवा गड्ढे बने हुए हैं। रात के अंधेरे में सड़क किनारे खड़े खराब वाहन दूर से दिखाई नहीं देते, जिससे आए दिन लोग हादसों का शिकार हो रहे हैं और प्रशासन आंखें मूंदे बैठा है।
मेडिकल बोर्ड ने किया पोस्टमार्टम, रांची में हुआ अंतिम विदाई का गमगीन मंजर
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और चारों शवों को मलबे से निकालकर एमजीएम अस्पताल भिजवाया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जिला प्रशासन ने तुरंत दंडाधिकारी की प्रतिनियुक्ति की और डॉक्टरों के मेडिकल बोर्ड से सभी का पोस्टमार्टम कराया गया। कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद मंत्री दीपिका पांडेय सिंह की बेटी युविका का पार्थिव शरीर रांची लाया गया, जहां परिजनों, करीबियों और तमाम गणमान्य लोगों की भीगी आंखों के बीच उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ।


