
Jharkhand High Court: जब जिंदगी बचाने वाले दो डॉक्टर ही अपने वैवाहिक जीवन की डोर न संभाल पाएं और बात धोखे व मारपीट तक पहुंच जाए, तो अदालत को भी रिश्तों की कड़वी हकीकत देखकर दखल देना पड़ता है। झारखंड हाईकोर्ट ने पति पत्नी के बीच चल रहे एक बेहद तल्ख पारिवारिक विवाद में डॉक्टर दंपति का विवाह पूरी तरह समाप्त करने का फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने पत्नी की अपील को जायज ठहराते हुए हजारीबाग फैमिली कोर्ट के उस पुराने फैसले को सिरे से पलट दिया, जिसमें महिला की तलाक की अर्जी खारिज कर दी गई थी। अदालत ने साफ लफ्जों में कहा कि पति का किसी अन्य महिला के साथ अवैध संबंध रखना और पत्नी को शारीरिक व मानसिक रूप से टॉर्चर करना सीधे तौर पर वैवाहिक क्रूरता है, जिसके आधार पर हिंदू विवाह अधिनियम के तहत रिश्ते को खत्म करना ही न्यायसंगत है।

सात फेरों के कुछ महीनों बाद ही बिखरने लगा डॉक्टरों का आशियाना
दोनों चिकित्सकों की शादी 24 फरवरी 2018 को हजारीबाग के चरही में पूरे हिंदू रीति रिवाज और धूमधाम के साथ हुई थी। उस वक्त पति धनबाद के टुंडी स्थित सोनी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में सरकारी डॉक्टर के तौर पर तैनात थे, जबकि पत्नी भी बीसीसीएल धनबाद में चिकित्सक के पद पर अपनी सेवाएं दे रही थीं। समाज की नजर में यह एक बेहद पढ़ा लिखा और आत्मनिर्भर जोड़ा था, लेकिन घर की चारदीवारी के भीतर हालात बिल्कुल उलट थे। शादी के चंद महीनों बाद ही दोनों के बीच दूरियां और विवाद शुरू हो गए। बात इस कदर बिगड़ी कि शादी के महज डेढ़ साल बाद 5 सितंबर 2019 से दोनों ने अपनी राहें अलग कर लीं और अलग रहने लगे।

दूसरी महिला से रिश्ते पर भरा था बॉन्ड, फिर भी नहीं बदली फितरत
अदालत के सामने पत्नी ने अपनी आपबीती रखते हुए गंभीर आरोप लगाए कि उनके डॉक्टर पति का एक विधवा महिला के साथ संबंध था। जब पत्नी को इस रिश्ते की भनक लगी तो उन्होंने इसका कड़ा विरोध किया और पति से यह रिश्ता खत्म करने की गुहार लगाई। उस समय मामले को दबाने के लिए पति ने बाकायदा एक लिखित बॉन्ड भी भरा था कि वह भविष्य में ऐसा कोई कदम नहीं उठाएगा। इसके बावजूद उसके चाल चलन और आचरण में रत्ती भर भी सुधार नहीं आया और वह लगातार पत्नी के साथ बदसलूकी करता रहा।
शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना से स्लिप डिस्क की शिकार हुईं डॉक्टर पत्नी
पत्नी ने अदालत को बताया कि पति के इस दोहरे रवैये और लगातार प्रताड़ना के चलते उन्हें भारी मानसिक तनाव और शारीरिक कष्ट झेलना पड़ा। इस लगातार कलह और जुल्म का असर उनकी सेहत पर इतना बुरा पड़ा कि वे स्लिप डिस्क जैसी गंभीर बीमारी की गिरफ्त में आ गईं। हजारीबाग फैमिली कोर्ट से राहत न मिलने के बाद जब वे हाईकोर्ट पहुंचीं, तो उच्च न्यायालय ने सारे तथ्यों और परिस्थितियों पर गौर करने के बाद माना कि ऐसे माहौल में रिश्ते को जबरन ढोना नामुमकिन है। अदालत ने पति के आचरण को क्रूरता मानते हुए तलाक की डिक्री मंजूर कर दी और महिला को इस बेमेल रिश्ते से कानूनी आजादी दे दी।


