
Khunti: जेलों में बंदियों के मानवाधिकार और समानता को लेकर सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद प्रशासनिक अमला पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहा है। शीर्ष अदालत द्वारा रिट याचिका (सिविल) संख्या 1404/2023 (सुकन्या शांता बनाम भारत संघ) में दिए गए अहम आदेशों के अनुपालन को परखने के लिए गुरुवार को खूंटी उपकारा का विस्तृत निरीक्षण किया गया। यह मुआयना जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डीएलएसए) और बोर्ड ऑफ विजिटर्स की संयुक्त टीम ने मिलकर किया।

जेल की दहलीज पर पहुंचे जिले के शीर्ष अफसर
निरीक्षण दल की अगुवाई खुद प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह डीएलएसए अध्यक्ष रसिकेश कुमार कर रहे थे। उनके साथ उपायुक्त मो. जावेद हुसैन, पुलिस अधीक्षक ऋषभ गर्ग, डीएलएसए सचिव कमलेश बेहरा और सिविल सर्जन डॉ. ललित रंजन पाठक भी मौजूद रहे। अधिकारियों के इस उच्चस्तरीय दल ने कारागार के हर हिस्से का बारीकी से मुआयना किया और बंदियों को दी जा रही सुविधाओं की हकीकत जांची।

न जाति का भेद, न रुतबे का असर
जांच के दौरान टीम ने पाया कि जेल की चहारदीवारी के भीतर बंदियों के बीच जाति, धर्म, लिंग अथवा दिव्यांगता के आधार पर किसी भी तरह का भेदभाव नहीं बरता जा रहा है। सभी बंदियों को नियमों के तहत बैरकों और वार्डों में समान रूप से जगह आवंटित की गई है। टीम ने रसोईघर में पहुंचकर खाने की गुणवत्ता देखी और अफसरों को साफ-सफाई के उच्चतम मानक बनाए रखने की सख्त ताकीद की। बीमार बंदियों के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच और दवाइयों की उपलब्धता भी संतोषजनक पाई गई।
मुफ्त कानूनी मदद के लिए डायल करें 15100
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने बंदियों से सीधे संवाद स्थापित किया और उन्हें उनके कानूनी अधिकारों की जानकारी दी। बंदियों को बताया गया कि पैरवी के अभाव में किसी का केस न रुके, इसके लिए विधिक सेवा प्राधिकार सदैव तत्पर है। कैदियों को मुफ्त कानूनी सलाह और सहायता के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 15100 की जानकारी दी गई। साथ ही, जेल प्रबंधन को सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का अक्षरशः पालन करते हुए कैदियों की मानवीय गरिमा का हर हाल में सम्मान करने का निर्देश दिया गया।


