
मोतिहारी: पूर्वी चंपारण के हरदिया-मजूरहा में करीब 13 करोड़ रुपये की लागत से बने आरसीसी पुल का एप्रोच पथ एक बार फिर चर्चा में है। पुल के उद्घाटन के करीब 20 दिन बाद एप्रोच पथ में कई जगह दरार और धंसान की शिकायत सामने आई है। स्थानीय लोगों के अनुसार, आधा दर्जन से अधिक स्थानों पर सड़क की स्थिति खराब हुई है। इससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

बताया जा रहा है कि इससे पहले भी पुल के एक छोर पर करीब 15 से 20 मीटर तक एप्रोच पथ में दरार पड़ने और सड़क धंसने की स्थिति सामने आई थी। इसके बाद विभाग की ओर से मरम्मत कराई गई थी। हालांकि, स्थानीय स्तर पर आरोप लगाया जा रहा है कि समस्या के मूल कारण की तकनीकी जांच करने के बजाय ऊपरी तौर पर पीचिंग और चेपी लगाकर मरम्मत कर दी गई।

उद्घाटन के कुछ दिन बाद फिर सामने आई समस्या
अब एप्रोच पथ पर दोबारा दरार और धंसान की शिकायत सामने आने के बाद निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सड़क बार-बार धंस रही है तो इसकी वजह सिर्फ सतह की खराबी है या मिट्टी भराई और बेस से जुड़ी कोई तकनीकी समस्या, इसकी जांच जरूरी है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, इस रास्ते से भारी वाहनों की आवाजाही भी होती है। ऐसे में अगर दरार और धंसान का दायरा बढ़ता है तो यातायात प्रभावित होने के साथ दुर्घटना का खतरा भी पैदा हो सकता है।
मरम्मत पर उठ रहे सवाल
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि एप्रोच पथ की बार-बार मरम्मत के बावजूद समस्या दोबारा क्यों सामने आ रही है। क्या निर्माण के दौरान मिट्टी भराई, सड़क की मोटाई और अन्य तकनीकी मानकों की पर्याप्त जांच हुई थी? अगर पहले सामने आई खामी की मरम्मत की गई थी तो कुछ ही समय बाद फिर से दरार और धंसान कैसे शुरू हो गया?
स्थानीय लोगों की मांग है कि सिर्फ ऊपरी मरम्मत के बजाय एप्रोच पथ की तकनीकी जांच कराई जाए, ताकि समस्या की वास्तविक वजह सामने आ सके।
पूर्व विधायक ने लगाए निर्माण में गड़बड़ी के आरोप
मामले को लेकर स्थानीय पूर्व विधायक राजेंद्र राम ने निर्माण कार्य में कथित अनियमितता के आरोप लगाए हैं। उनका आरोप है कि निर्माण कार्य में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और संबंधित लोगों की कथित मिलीभगत से सरकारी राशि का दुरुपयोग किया गया और गुणवत्ता से समझौता हुआ।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में निर्माण कार्य की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए तकनीकी जांच महत्वपूर्ण हो जाती है। जांच में निर्माण सामग्री, मिट्टी भराई, सड़क की मोटाई, बेस की मजबूती और निर्धारित गुणवत्ता मानकों की जांच की जा सकती है।
करीब 13 करोड़ रुपये की लागत से बने पुल के एप्रोच पथ में उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद बार-बार दरार और धंसान की शिकायत सामने आने से अब निगाहें विभागीय जांच पर हैं। सवाल यही है कि इस बार सिर्फ मरम्मत होगी या समस्या की जड़ तक पहुंचकर इसकी तकनीकी जांच भी कराई जाएगी।
(प्रतिक सिंह की रिपोर्ट)


