
गया। विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला 25 सितंबर से शुरू हो चुका है। मेले के दूसरे दिन शनिवार से गया श्राद्ध की शुरुआत होती है। धार्मिक परंपरा के अनुसार, इस दिन फल्गु नदी के तट पर पिंडदान और श्राद्ध-तर्पण करने का विशेष महत्व माना जाता है। देश-विदेश से गया पहुंच रहे श्रद्धालु फल्गु नदी में स्नान के बाद अपने पितरों के निमित्त पिंडदान का कर्मकांड करते हैं।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा के दिन फल्गु तीर्थ के तट पर पिंडदान करने से पिंडदानी के कुल की सात पीढ़ियों के उद्धार की मान्यता है। श्रद्धालु यहां खीर से पिंड बनाकर पिंडदान और तर्पण का कर्मकांड करते हैं।

फल्गु नदी के तट से शुरू होता है गया श्राद्ध
गया श्राद्ध के पहले दिन फल्गु नदी में स्नान और उसके तट पर पिंडदान करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, फल्गु नदी को गंगा के समान पवित्र माना गया है। यही वजह है कि पितृपक्ष के दौरान फल्गु तट पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पिंडदान और तर्पण के लिए पहुंचते हैं।
तीर्थयात्री पहले फल्गु नदी में स्नान करते हैं और इसके बाद गयापाल पंडा से विधि-विधान की जानकारी और अनुमति लेकर श्राद्ध कर्म की शुरुआत करते हैं। खीर से तैयार पिंड के जरिए पितरों का तर्पण किया जाता है।
भगवान विष्णु से जुड़ी है फल्गु तीर्थ की मान्यता
धार्मिक ग्रंथों और स्थानीय परंपराओं में फल्गु नदी का संबंध भगवान विष्णु से बताया गया है। फल्गु तीर्थ को गया श्राद्ध के प्रमुख स्थलों में माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि फल्गु में स्नान और उसके तट पर पिंडदान करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
पितृपक्ष के दौरान फल्गु नदी के तट पर होने वाले इस कर्मकांड को गया श्राद्ध की महत्वपूर्ण प्रक्रिया माना जाता है। अलग-अलग धार्मिक परंपराओं के अनुसार श्रद्धालु अपने पूर्वजों के लिए तर्पण और पिंडदान करते हैं।
देश-विदेश से गया पहुंच रहे श्रद्धालु
पितृपक्ष मेला शुरू होने के साथ ही गया में देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालुओं का पहुंचना जारी है। कई तीर्थयात्री एक दिन का श्राद्ध कर्म करते हैं, जबकि त्रैपाक्षिक श्राद्ध करने वाले श्रद्धालु लंबे समय तक गया में रहकर अलग-अलग वेदियों पर पिंडदान करते हैं।
गया में पिंडदान के लिए फल्गु नदी के अलावा कई अन्य महत्वपूर्ण वेदियां भी हैं, जहां श्रद्धालु निर्धारित विधि के अनुसार कर्मकांड करते हैं। पितृपक्ष मेले के दौरान गया में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने को देखते हुए प्रशासन की ओर से भी व्यवस्थाएं की गई हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, फल्गु तट पर पिंडदान और तर्पण के साथ गया श्राद्ध की प्रक्रिया आगे बढ़ती है। इसी आस्था के चलते पितृपक्ष के दौरान फल्गु नदी का तट श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख धार्मिक केंद्र बना हुआ है।


