
Bengaluru: बेंगलुरु में IVF के जरिए जन्मी दो जुड़वां बच्चियों की उनकी ही मां उमा देवी द्वारा हत्या और फिर खुद आत्महत्या की कोशिश का मामला बेहद चौंकाने वाला है। ऐसा ही एक मामला अमेरिका में भी सामने आया है, जहां एक महिला पर अपने तीन बच्चों की जान लेने का आरोप है। दोनों मामलों में जांच और वकीलों की दलीलों से जो बात सामने आ रही है, वह पोस्टपार्टम साइकोसिस है। आखिरकार बच्चे के जन्म जैसी सबसे बड़ी खुशी के बाद एक मां इस कदर मानसिक रूप से बीमार कैसे हो जाती है कि वह अपने ही मासूम बच्चों की दुश्मन बन बैठे, यह एक बड़ा सवाल बनकर उभरा है।

क्या है पोस्टपार्टम डिप्रेशन और साइकोसिस
विशेषज्ञों के अनुसार, डिलीवरी के बाद महिलाओं में मेंटल हेल्थ की समस्या की शुरुआत बहुत धीमे तरीके से होती है। जन्म के कुछ दिनों बाद तक मूड बदलना, बिना वजह रोना या चिड़चिड़ापन होना सामान्य है, जिसे बेबी ब्लूज़ कहा जाता है और यह आमतौर पर कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है। हालांकि, अगर बेबी ब्लूज़ के साथ परिवार से सहयोग न मिले, बच्चा बीमार रहे या मां की नींद पूरी न हो, तो यह गंभीर डिप्रेशन में बदल जाता है जिसे पोस्टपार्टम डिप्रेशन कहते हैं। इसमें महिला लगातार उदास रहने लगती है और उसे अजीब व डरावने विचार आते हैं। इसकी सबसे खतरनाक स्थिति पोस्टपार्टम साइकोसिस है, जिसमें महिला को भ्रम होने लगता है, ऐसी आवाजें सुनाई देने लगती हैं जो वास्तव में नहीं हैं, और वह खुद को या अपने बच्चे को नुकसान पहुंचा सकती है।

नींद की कमी और हार्मोनल बदलाव हैं मुख्य वजह
सवाई मानसिंह अस्पताल जयपुर और RML अस्पताल दिल्ली के मानसिक रोग विशेषज्ञों का कहना है कि डिलीवरी के बाद महिलाओं के शरीर में जरूरी हार्मोनों का स्तर अचानक गिर जाता है। इसके अलावा C Section की तकलीफों और नवजात के कारण बार-बार रात में नींद टूटने से मानसिक संतुलन बिगड़ने लगता है। अगर इस वक्त परिवार से इमोशनल या व्यावहारिक सपोर्ट न मिले, तो स्थिति पूरी तरह बेकाबू होने लगती है।
लक्षण पहचानना और परिवार का सहयोग है बेहद जरूरी
अगर घर में हाल ही में मां बनी महिला हमेशा उदास रहे, बहुत ज्यादा चिंता या बेचैनी में हो, उसकी नींद पूरी तरह बंद या बहुत कम हो जाए और बच्चे के प्रति लगाव खत्म होने लगे तो तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए। डॉक्टरों की सलाह है कि डिलीवरी के बाद मां से कभी यह न कहें कि सबके बच्चे होते हैं, तुम ही इतनी परेशान क्यों हो। पति को भी रात में बच्चे की देखरेख में हाथ बंटाना चाहिए ताकि मां को कम से कम कुछ घंटे लगातार नींद मिल सके। महिला को सिर्फ बच्चे को संभालने की जिम्मेदारी न देकर उसे आराम, बातचीत और अपना समय देना बेहद जरूरी है। अगर किसी महिला में ऐसे लक्षण दिखें तो तुरंत मनोरोग विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए, क्योंकि सही काउंसलिंग और दवाओं से इस परेशानी पर आसानी से काबू पाया जा सकता है।


