
Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने BIT सिंदरी के चार असिस्टेंट प्रोफेसरों के हक में एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने राज्य सरकार और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिया है कि इन चारों शिक्षकों को वर्ष 2019 की प्रभावी तिथि से एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर पदोन्नत किया जाए। राहत पाने वाले शिक्षकों में प्रोफेसर रवि शंकर प्रसाद, राजेन कुमार नायक, उज्ज्वल कुमार नायक और अभय ज्ञान पी. कुजूर शामिल हैं। हाईकोर्ट के इस ऐतिहासिक आदेश के बाद संस्थान के शिक्षकों और शैक्षणिक जगत में खुशी की लहर दौड़ गई है।

मामूली तकनीकी खामियों की आड़ में नहीं रुक सकती चयन प्रक्रिया
मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने बेहद तल्ख टिप्पणी की। अदालत ने साफ किया कि प्रशासनिक स्तर पर हुई मामूली तकनीकी त्रुटियों या प्रक्रियात्मक देरी के आधार पर चार साल तक चली लंबी और वैध चयन प्रक्रिया को किसी भी हाल में रद्द नहीं किया जा सकता। अदालत ने माना कि चयन प्रक्रिया के दौरान जो भी कमियां या विलंब हुआ, वह पूरी तरह से प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही की वजह से था। ऐसे में अधिकारियों की सुस्ती और गलतियों का खामियाजा उन शिक्षकों को बिल्कुल नहीं भुगतना चाहिए जिन्होंने निष्पक्ष रूप से अपनी अर्हता सिद्ध की है।

8 सप्ताह के भीतर एरियर और सभी लाभ देने के कड़े निर्देश
हाईकोर्ट ने संबंधित उच्च अधिकारियों को सख्त निर्देश दिया है कि वे आदेश मिलने की तिथि से अगले आठ सप्ताह के भीतर चारों प्रोफेसरों की पदोन्नति की औपचारिक अधिसूचना जारी करें। इसके साथ ही अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि इन सभी शिक्षकों को 2019 की पात्रता तिथि से ही एसोसिएट प्रोफेसर का पद, सभी परिणामी सेवा लाभ और वेतन के एरियर का भुगतान किया जाए।
वर्षों के इंतजार के बाद आखिरकार मिला इंसाफ
शिक्षकों के प्रमोशन का यह मामला लंबे समय से प्रशासनिक पचड़ों और तकनीकी उलझनों की वजह से अटका पड़ा था। वर्षों तक विभाग के चक्कर काटने और लगातार आश्वासन मिलने के बाद पीड़ित शिक्षकों ने न्याय के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अदालत के इस स्पष्ट और कड़े फैसले से न केवल इन चार प्रोफेसरों को उनका वाजिब हक मिला है, बल्कि भविष्य के लिए भी प्रशासनिक लेट-लतीफी पर एक बड़ा संदेश गया है।


