
Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकार (NHAI) के एक अधिकारी की पदोन्नति से जुड़े विवाद में बड़ा और सख्त फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की दो सदस्यीय खंडपीठ ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) के उस आदेश को पूरी तरह से रद्द कर दिया है जिसमें अधिकारी को राहत दी गई थी। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने NHAI के उस पुराने डिमोशन आदेश को पूरी तरह बहाल कर दिया है, जिसके तहत उक्त अधिकारी को डिप्टी जनरल मैनेजर (Technical) के ऊंचे पद से पदावनत कर वापस उनके मूल पद टेक्निकल असिस्टेंट पर भेज दिया गया था।

सुप्रीम कोर्ट से रद्द डिग्री के आधार पर मिली थी पदोन्नति
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि जिस BTech डिग्री के आधार पर अधिकारी को लगातार प्रमोशन दिए जा रहे थे, उसे देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) पहले ही अवैध घोषित कर रद्द कर चुकी है। ऐसे में किसी भी रद्द हो चुकी डिग्री के दम पर हासिल किए गए पदोन्नति के लाभ को वापस लेना पूरी तरह से सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुकूल है। हाईकोर्ट ने दोटूक शब्दों में कहा कि सेवा नियमों में तय की गई अनिवार्य शैक्षणिक योग्यता की कमी को सिर्फ लंबे कार्य अनुभव के आधार पर पूरा नहीं माना जा सकता।

1997 से शुरू हुआ था ड्राफ्ट्समैन का सफर
मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, संबंधित अधिकारी की NHAI में साल 1997 में ड्राफ्ट्समैन के पद पर बहाली हुई थी, जिसे बाद में पुनर्गठित कर टेक्निकल असिस्टेंट का नाम दिया गया। नौकरी में रहते हुए उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया और फिर 2008 से 2011 के दौरान जनार्दन राय नगर राजस्थान विद्यापीठ से BTech की डिग्री प्राप्त की। इसी डिग्री को आधार बनाकर उन्होंने 2011 में मैनेजर (Technical) के लिए आवेदन किया और पदोन्नति पाते हुए अंततः डिप्टी जनरल मैनेजर (Technical) के पद तक पहुंच गए थे।
CAT के राहत वाले फैसले को हाईकोर्ट ने किया खारिज
सुप्रीम कोर्ट द्वारा उक्त यूनिवर्सिटी की डिग्रियों को अमान्य ठहराए जाने के बाद NHAI ने साल 2021 में अधिकारी को उनके मूल पद टेक्निकल असिस्टेंट पर रिवर्ट कर दिया था। हालांकि 2022 में हाईकोर्ट ने प्राकृतिक न्याय का पालन करने को कहते हुए नए सिरे से सुनवाई का आदेश दिया, जिसके बाद NHAI ने जून 2024 में शो-कॉज नोटिस देकर दोबारा डिमोशन का कड़ा आदेश जारी किया। इस आदेश को कैट (CAT) ने रद्द कर दिया था, लेकिन अब हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कैट के उस फैसले को पूरी तरह खारिज करते हुए NHAI के रिवर्जन आदेश पर अपनी अंतिम मुहर लगा दी है।


