
DSP Amar Kumar Pandey: राजधानी रांची के पुलिस मुख्यालय-1 में पदस्थापित वरिष्ठ DSP अमर कुमार पांडे को लेकर विवाद गहरा गया है। आदिवासी समन्वय समिति के संयोजक लक्ष्मी नारायण मुंडा ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लिखित शिकायत पत्र सौंपकर अधिकारी के खिलाफ निष्पक्ष जांच की मांग की है। शिकायत में DSP के तबादले, जमीन मामलों में कथित संलिप्तता और उनकी संपत्ति की जांच विजिलेंस, सीआईडी (CID) या किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराने का अनुरोध किया गया है। पत्र में कहा गया है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित पुलिस अधिकारी के खिलाफ सख्त विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाए।

तबादला रुकवाने और SIT से हटाए जाने का लगाया आरोप
शिकायतकर्ता लक्ष्मी नारायण मुंडा का आरोप है कि फरवरी 2025 में सीनियर डीएसपी रैंक में प्रोन्नत हुए अमर कुमार पांडे का मई 2026 में झारखंड जगुआर तबादला किया गया था, लेकिन उन्होंने प्रभाव का इस्तेमाल कर अपना ट्रांसफर रुकवा लिया। इसके अलावा, अगस्त 2025 में जमीन मामलों के लिए गठित एसआईटी (SIT) से उन्हें हटाए जाने और चुटिया क्षेत्र के एक मामले में अनियमितता की बात भी पत्र में कही गई है। हालांकि, शिकायतकर्ता ने खुद स्वीकार किया है कि उनके पास इन आरोपों से जुड़ी कोई आधिकारिक जांच रिपोर्ट या चार्जशीट मौजूद नहीं है और वे सोशल मीडिया व YouTube पर चल रही खबरों के आधार पर कांके अंचल में उनकी भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं।

‘शिकायतकर्ता खुद भू-माफिया, कई संगीन धाराओं में है आरोपी’
आरोपों पर कड़ा रुख अपनाते हुए DSP अमर कुमार पांडे ने सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। DSP ने कहा कि शिकायतकर्ता लक्ष्मी नारायण मुंडा खुद अवैध जमीन कारोबार में लिप्त है और उसके खिलाफ कई संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं। उन्होंने खुलासा किया कि मुंडा और जमीन कारोबारी कृष्णा नायक बुकरू स्थित शारदा ग्लोबल स्कूल के पास की कीमती जमीन पर अवैध कब्जा करने का प्रयास कर रहे थे। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर इस अवैध कब्जे को रुकवाया था। इस प्रशासनिक कार्रवाई और पुलिस दबाव से बौखलाकर वह पुलिस पर अनर्गल और निराधार आरोप लगा रहा है।
RIMS-2 जमीन मामले में एफआईआर दर्ज, गिरफ्तारी से बचने के लिए फरार
DSP अमर कुमार पांडे ने बताया कि कांके अंचलाधिकारी (CO) अमित भगत के लिखित आवेदन पर कांके थाने में कांड संख्या 228/25 दर्ज है। यह मामला रिम्स-2 (RIMS-2) की सरकारी जमीन पर काम में बाधा डालने, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, दंगा भड़काने और पुलिस बल व मजिस्ट्रेट पर जानलेवा हमला करने से जुड़ा है। पुलिस अनुसंधान में लक्ष्मी नारायण मुंडा के खिलाफ लगाए गए आरोप सत्य पाए गए हैं और वह गिरफ्तारी से बचने के लिए फिलहाल फरार चल रहा है। पुलिस के मुताबिक, भू-माफियाओं द्वारा आदिवासी और भुईंहरी जमीन हड़पने की कोशिशों पर प्रशासन ने रोक लगाई है और क्षेत्र में बीएनएसएस (163 BNSS) के तहत निरोधात्मक कार्रवाई भी की गई है।


