
New Delhi: व्यापारियों पर दो हजार रुपये से अधिक के UPI लेन देन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR शुल्क लगाने के केंद्र सरकार के फैसले का मामला अब देश की शीर्ष अदालत की चौखट पर पहुंच चुका है। केंद्र सरकार की इस नई नीति और अधिसूचना को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट आगामी सोमवार को सुनवाई करने के लिए सहमत हो गया है।

सीजेआई की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ करेगी सुनवाई
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए याचिका पर सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय विशेष खंडपीठ द्वारा की जाएगी। वरिष्ठ अधिवक्ता अंजन दत्ता द्वारा दायर इस जनहित याचिका में केंद्र सरकार द्वारा जारी चौदह सितंबर की अधिसूचना और पंद्रह सितंबर को घोषित किए गए नए MDR ढांचे की वैधानिकता पर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता ने पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट 2007 की संशोधित धारा 10ए की संवैधानिक वैधता को भी कठघरे में खड़ा किया है।

बिना स्पष्ट नीति के विशेषाधिकार देने का आरोप
दाखिल याचिका में दलील दी गई है कि कानून की यह विशेष धारा कार्यपालिका को बिना किसी पारदर्शी दिशा निर्देश के यह मनमाना अधिकार सौंपती है कि वह अपनी मर्जी से तय करे कि किन इलेक्ट्रॉनिक भुगतान प्रणालियों को शुल्क मुक्त रखा जाए और किन पर टैक्स या चार्ज लगाया जाए। इसके साथ ही याचिका में UPI लेन देन और RuPay डेबिट कार्ड के बीच किए गए अंतर पर भी सवाल उठाया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि सरकार ने RuPay डेबिट कार्ड से भुगतान पर बिना किसी मौद्रिक सीमा के पूरी तरह शुल्क मुक्ति का लाभ जारी रखा है, जबकि UPI पर यह पाबंदी लगाई जा रही है।
कम मार्जिन वाले छोटे दुकानदारों पर दोहरी मार
याचिका में अदालत से गुहार लगाई गई है कि सरकार का यह नया फ्रेमवर्क पूरी तरह मनमाना और भेदभावपूर्ण है। इस व्यवस्था से छोटे और कम मुनाफे पर काम करने वाले खुदरा कारोबारियों की कमर टूट जाएगी और देश में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के प्रयासों को भी भारी धक्का लगेगा। इसलिए जनहित याचिका में इस पूरी व्यवस्था पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने अथवा इसे पूरी तरह रद्द करने की मांग की गई है।
क्या है केंद्र का प्रस्तावित नया नियम
केंद्र सरकार के प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार पंद्रह अक्टूबर से व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर दो हजार रुपये से अधिक के UPI भुगतान पर शून्य दशमलव चार प्रतिशत का MDR शुल्क लागू करने की तैयारी है। वहीं पचहत्तर हजार रुपये या उससे अधिक के बड़े लेन देन पर यह अधिकतम तीन सौ रुपये तक सीमित रहेगा। इसके अलावा म्यूचुअल फंड, शेयर बाजार और सिक्योरिटीज से जुड़े भुगतान पर शून्य दशमलव शून्य दो प्रतिशत की दर तय की गई है। हालांकि आम नागरिकों के बीच होने वाले रोजमर्रा के व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) लेन देन पर कोई भी चार्ज नहीं लगेगा, जो कि देश के कुल UPI लेन देन का बड़ा हिस्सा बनता है।


