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UPI यूजर्स के लिए बड़ा अपडेट! ₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट पर चार्ज को SC ने नहीं रोका, जानें अब क्या होगा

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नई दिल्ली: 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा UPI Person-to-Merchant (P2M) लेनदेन पर Merchant Discount Rate (MDR) लगाने के केंद्र सरकार के फैसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालांकि, अदालत ने इस व्यवस्था को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

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सुप्रीम कोर्ट ने मामले को तकनीकी प्रकृति का बताते हुए संबंधित पक्षों को चार सप्ताह के भीतर काउंटर एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया। इस बीच 15 अक्टूबर से लागू होने वाला नया MDR ढांचा फिलहाल प्रभावी होने से नहीं रोका गया है।

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2,000 रुपये से ज्यादा के कुछ UPI पेमेंट पर 0.4% MDR

केंद्र सरकार की ओर से घोषित नए फ्रेमवर्क के तहत 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा P2M UPI लेनदेन पर 0.4% MDR लागू किया जाना है। 75,000 रुपये या उससे अधिक के भुगतान पर MDR की अधिकतम सीमा 300 रुपये रखी गई है। हालांकि, सभी P2M लेनदेन इस शुल्क के दायरे में नहीं आएंगे।

सरकार के अनुसार, P2P यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किए जाने वाले UPI ट्रांजैक्शन पर इस व्यवस्था का कोई असर नहीं होगा। राशि कितनी भी हो, P2P UPI भुगतान मुफ्त रहेगा। 2,000 रुपये तक के भुगतान और निर्धारित छोटे व्यापारियों से जुड़े जीरो-MDR लेनदेन भी शुल्क से बाहर रहेंगे।

करीब 96% P2M ट्रांजैक्शन पर असर नहीं

केंद्र सरकार ने कहा है कि नए MDR ढांचे से करीब 96 प्रतिशत P2M UPI लेनदेन प्रभावित नहीं होंगे। सरकार के मुताबिक, MDR ग्राहक से वसूला जाने वाला सरकारी शुल्क नहीं है, बल्कि भुगतान इकोसिस्टम के प्रतिभागियों के बीच वितरित होने वाला व्यावसायिक चार्ज है।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि बैंकों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि MDR का बोझ सीधे ग्राहकों पर न डाला जाए। UPI एप्लीकेशन प्रोवाइडर्स को प्लेटफॉर्म फीस या छिपे हुए शुल्क लगाने से भी रोका गया है।

याचिका में क्या है चुनौती?

सुप्रीम कोर्ट में दायर जनहित याचिका में केंद्र के MDR फ्रेमवर्क और इससे संबंधित अधिसूचना को चुनौती दी गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि शुल्क व्यवस्था लागू करने से पहले पर्याप्त वैधानिक सुरक्षा, पारदर्शिता और सार्वजनिक परामर्श नहीं किया गया। याचिकाकर्ता ने Payment and Settlement Systems Act, 2007 की संशोधित धारा 10A से जुड़े सवाल भी उठाए हैं।

याचिका में UPI और RuPay डेबिट कार्ड के लिए अलग-अलग शुल्क व्यवस्था पर भी सवाल उठाए गए हैं। अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा केंद्र और अन्य पक्षों से जवाब मांगे जाने के बाद मामले की अगली सुनवाई में इस व्यवस्था से जुड़े कानूनी और तकनीकी पहलुओं पर आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

फिलहाल क्या बदला?

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने 15 अक्टूबर से प्रस्तावित MDR व्यवस्था पर अंतरिम रोक नहीं लगाई है। यानी सरकार द्वारा घोषित फ्रेमवर्क लागू होने का रास्ता खुला है। हालांकि, इसकी वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई जारी रहेगी और केंद्र, RBI तथा अन्य पक्षों के जवाब के बाद अदालत मामले पर आगे विचार करेगी।

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