
JPSC Exam Controversy: झारखंड संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा (JPSC) और झारखंड सीजीएल (CGL) परीक्षा में कथित गड़बड़ी और बड़े पैमाने पर हुई धांधली की निष्पक्ष CBI जांच कराने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में अब पांच अक्टूबर को सुनवाई होगी। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की तीन सदस्यीय विशेष पीठ के समक्ष इस बहुचर्चित मामले की सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने इस मामले को आगे की कार्यवाही के लिए दूसरी बेंच में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया है।

सरकार के जवाब न देने पर प्रार्थी ने जताई आपत्ति
सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान मामले से जुड़े कई अन्य पक्षों की ओर से अदालत से अपना पक्ष और विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की गई। इस पर याचिकाकर्ता पक्ष ने कड़ा एतराज जताते हुए अदालत का ध्यान आकृष्ट कराया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूर्व में दिए गए स्पष्ट आदेश के बावजूद राज्य सरकार ने अब तक अपना आधिकारिक जवाब रिकॉर्ड पर पेश नहीं किया है। अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आगे की बहस के लिए पांच अक्टूबर की तारीख तय की है।

सामाजिक कार्यकर्ता ने लगाई है CBI जांच की गुहार
झारखंड की प्रमुख नियुक्ति परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर यह जनहित याचिका सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन की ओर से दायर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि दोनों ही परीक्षाओं के आयोजन और परिणाम जारी करने की प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर धांधली और भ्रष्टाचार हुआ है, जिससे योग्य और मेहनती अभ्यर्थियों का भविष्य दांव पर लग गया है। पूरे सिंडिकेट और सिस्टम की खामियों को बेनकाब करने के लिए मामले की स्वतंत्र जांच सीधे CBI से कराने की मांग की गई है।
रिफॉर्म मंच ने दाखिल की दो अलग हस्तक्षेप याचिकाएं
इस अहम कानूनी लड़ाई में JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच की ओर से भी सुप्रीम कोर्ट में दो अलग-अलग हस्तक्षेप याचिकाएं दाखिल की गई हैं। इन याचिकाओं के माध्यम से मंच ने परीक्षा संचालन, प्रश्नपत्रों के वितरण, उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन और अब तक उजागर हुई तमाम कथित प्रशासनिक गड़बड़ियों से जुड़े पुख्ता तकनीकी साक्ष्य और तथ्य अदालत की मेज पर रखे हैं। अब सभी पक्षों की निगाहें पांच अक्टूबर को दूसरी बेंच में होने वाली निर्णायक सुनवाई पर टिकी हैं।


