
Ranchi : राजधानी रांची की अपर न्यायायुक्त कुलदीप की अदालत ने चेक बाउंस से जुड़े एक गंभीर मामले में सजायाफ्ता आरोपी राजेश गुप्ता को बड़ा झटका देते हुए उसकी क्रिमिनल अपील खारिज कर दी है। इसके साथ ही अदालत ने निचली अदालत द्वारा 21 फरवरी 2024 को सुनाई गई 6 महीने के साधारण कारावास और जुर्माने की सजा के आदेश को पूरी तरह से बरकरार रखा है। कोर्ट ने दोषी को तुरंत आत्मसमर्पण (सरेंडर) करने और पीड़ित को 7.50 लाख रुपये का मुआवजा भरने का सख्त निर्देश दिया है।

जमीन और रेलवे में नौकरी के नाम पर की थी 16 लाख की ठगी
मामले के अनुसार, शिकायतकर्ता इंद्रदेव प्रसाद सिंह ने आरोपी राजेश गुप्ता पर आरोप लगाया था कि उसने खुद को जमीन दलाल और रेलवे में नौकरी दिलाने वाला बताकर उनसे कुल 16 लाख रुपये ठग लिए थे। जब पैसे वापस करने का दबाव बनाया गया, तो आरोपी ने उन्हें 7.50 लाख रुपये का एक चेक थमा दिया। हालांकि, जब शिकायतकर्ता ने चेक को बैंक में जमा कराया, तो वह बाउंस हो गया, जिसके बाद पीड़ित ने न्याय की गुहार लगाते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था।

हस्ताक्षर साबित होने के बाद कोर्ट ने खारिज की अपील
अदालत ने पूरे मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि चेक पर आरोपी के हस्ताक्षर पूरी तरह साबित हो चुके हैं। कानून के मुताबिक, हस्ताक्षर साबित होने के बाद वैधानिक अनुमान शिकायतकर्ता के पक्ष में ही जाता है, जिसे आरोपी अदालत के समक्ष झुठलाने में पूरी तरह नाकाम रहा। सभी साक्ष्यों और दलीलों को ध्यान में रखते हुए अपर न्यायायुक्त की अदालत ने निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया और आरोपी की अपील खारिज करते हुए उसे 6 महीने के साधारण कारावास के साथ 7.50 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश जारी किया।


