
Deoghar: झारखंड प्रशासनिक सेवा के अधिकारी मिथिलेश कुमार झा को बड़ी राहत मिली है। राज्य सरकार ने विभागीय कार्रवाई के बाद उन्हें दिए गए दंड से मुक्त कर दिया है। कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग की ओर से इस संबंध में आदेश जारी किया गया है।

विभागीय कार्रवाई में मिला था डिमोशन का दंड
मिथिलेश कुमार झा के खिलाफ लगे आरोपों को लेकर विभागीय कार्रवाई चली थी। इसके बाद विभाग ने उन्हें डिमोशन करने का आदेश दिया था। इतना ही नहीं, अगले सात साल तक उन्हें प्रोन्नति के योग्य नहीं मानने का भी फैसला लिया गया था।

इस कार्रवाई के खिलाफ मिथिलेश कुमार झा ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
हाईकोर्ट पहुंचा मामला, फिर बदला फैसला
मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट से मिले आदेश के आधार पर राज्य सरकार ने मिथिलेश कुमार झा को पहले दिए गए दंड से मुक्त कर दिया है। कार्मिक विभाग ने अपने आदेश में यह भी साफ किया है कि यह फैसला एलपीए के अंतिम नतीजे के अधीन प्रभावी रहेगा।
यानी एलपीए में आने वाले अंतिम फैसले के आधार पर आगे की स्थिति तय हो सकती है।
देवघर में तैनाती के दौरान लगा था आरोप
मिथिलेश कुमार झा देवघर जिला अभिलेखागार में प्रभारी उप समाहर्ता के पद पर तैनात थे। इसी दौरान उनके खिलाफ आरोप सामने आए थे। देवघर के तत्कालीन उपायुक्त ने अक्टूबर 2011 में उनके खिलाफ आरोप पत्र गठित किया था।
इसके बाद विभागीय स्तर पर कार्रवाई आगे बढ़ी और उन्हें दंड दिया गया। लंबे समय तक चले इस मामले में अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद उन्हें राहत मिली है।


