
Deoghar:देवघर जिले के ग्रामीण इलाकों में मवेशियों के बीच लंपी स्किन डिजीज (एलएसडी) जैसे लक्षण दिखने के बाद से पशुपालकों की चिंता बढ़ गई है। अलग-अलग प्रखंडों के कई गांवों में गायों के अलावा छोटे बछड़ों में भी इस बीमारी के लक्षण मिलने की बात सामने आ रही है। सारठ प्रखंड की पथरड्डा पंचायत स्थित कुण्डारो गांव में कई दुधारू पशुओं के शरीर पर असामान्य गांठें और चकत्ते देखे गए हैं, जिससे इलाके के किसान परेशान हैं।

रोजी-रोटी पर संकट, जांच और इलाज की मांग
गांवों के छोटे और सीमांत किसानों का कहना है कि उनके परिवार का गुजारा पूरी तरह दूध और पशुधन पर निर्भर है। ऐसे में अगर लंपी वायरस का संक्रमण फैलता है, तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। स्थानीय किसान अजीत यादव ने बताया कि मवेशियों में बीमारी के लक्षण दिख रहे हैं। उन्होंने पशुपालन विभाग से तुरंत गांवों में कैंप लगाने, संदिग्ध पशुओं की जांच करने और बचाव के लिए जरूरी दवाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।

सभी प्रखंडों में वैक्सीन उपलब्ध, टीकाकरण की अपील
मामले को गंभीरता से लेते हुए पशुपालन विभाग सतर्क हो गया है। जिला पशुपालन पदाधिकारी धनंजय कुमार ने बताया कि जिले के सभी प्रखंडों में लंपी स्किन डिजीज से बचाव के टीके पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। उन्होंने पशुपालकों से अपील की है कि वे समय गंवाए बिना नजदीकी पशु चिकित्सा केंद्र से संपर्क करें और अपने मवेशियों का टीकाकरण कराएं, ताकि संक्रमण के खतरे को रोका जा सके।
संक्रमित पशुओं को तुरंत बाकी मवेशियों से अलग रखें
पशुपालन विभाग ने किसानों के लिए जरूरी गाइडलाइन भी जारी की है। अधिकारियों ने सलाह दी है कि जिन पशुओं में बीमारी के शुरुआती लक्षण दिखें, उन्हें तुरंत बाकी स्वस्थ मवेशियों से अलग कर दें। पशुओं के रहने की जगह पर साफ-सफाई का खास ध्यान रखें और नियमित छिड़काव करें। इसके साथ ही किसी भी तरह के लक्षण दिखने पर लापरवाही न बरतें और फौरन नजदीकी पशु चिकित्सक से संपर्क कर सही इलाज शुरू कराएं।


