
मोतिहारी: पूर्वी चंपारण में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने और मॉडल स्कूलों की निगरानी मजबूत करने के लिए 30 सितंबर को जिले के सभी 33 सरस्वती विद्या निकेतन (आदर्श विद्यालयों) का अधिकारियों ने निरीक्षण किया। इस दौरान जिलाधिकारी ने खुद शिक्षक की भूमिका निभाई और जिला स्कूल मोतिहारी में करीब एक घंटे तक बच्चों को पढ़ाया।

बिहार सरकार की योजना के तहत जुलाई 2026 में राज्यभर में 551 सरस्वती विद्या निकेतन (आदर्श विद्यालयों) का लोकार्पण किया गया था। इन विद्यालयों का उद्देश्य विद्यार्थियों को आधुनिक संसाधनों के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है।

पूर्वी चंपारण में 33 विद्यालयों को मॉडल स्कूल के रूप में चिन्हित किया गया है। इन स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम, ई-लाइब्रेरी, विज्ञान एवं कंप्यूटर प्रयोगशाला और खेलकूद जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं।
DM ने संभाली शिक्षक की भूमिका
जिलाधिकारी ने जिला स्कूल मोतिहारी को गोद लिया है। निरीक्षण के दौरान उन्होंने विद्यार्थियों से संवाद किया और करीब एक घंटे तक कक्षा में शिक्षक की भूमिका निभाते हुए बच्चों को पढ़ाया।
उन्होंने विद्यार्थियों से उनकी पढ़ाई, समस्याओं और जरूरतों के बारे में जानकारी ली। इसके साथ ही विद्यालय की विभिन्न व्यवस्थाओं का निरीक्षण कर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
अधिकारियों ने अलग-अलग स्कूलों का लिया जायजा
मंगल सेमिनरी की जिम्मेदारी अपर समाहर्ता लोक शिकायत मुकेश कुमार सिन्हा को दी गई है, जबकि एमजेके बालिका इंटर कॉलेज की जिम्मेदारी उप विकास आयुक्त डॉ. प्रदीप कुमार को सौंपी गई है।
उप विकास आयुक्त ने एमजेके बालिका इंटर विद्यालय का निरीक्षण कर पठन-पाठन और विद्यालय की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। छात्राओं से बातचीत के दौरान उनकी समस्याएं और सुझाव भी सुने गए। छात्राओं ने विद्यालय परिसर में कैंटीन शुरू करने की मांग रखी, जिस पर उप विकास आयुक्त ने आगे की कार्रवाई का भरोसा दिया।
स्कूलों में स्मार्ट क्लास और लैब की भी जांच
सभी 33 मॉडल स्कूलों में अधिकारियों ने कक्षाओं के अलावा साइंस लैब, लाइब्रेरी, स्मार्ट क्लास, ईको लैब, डिजिटल शिक्षा, खेलकूद और सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़ी व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया।
अधिकारियों ने विद्यार्थियों से सीधे बातचीत कर स्कूल की शिक्षा व्यवस्था और उपलब्ध सुविधाओं को लेकर फीडबैक भी लिया।
अभिभावकों से भी लिया गया फीडबैक
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी में भी भाग लिया। अभिभावकों से बच्चों की पढ़ाई, विद्यालय की व्यवस्थाओं और उपलब्ध सुविधाओं के संबंध में जानकारी ली गई।
प्रशासन के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य केवल स्कूलों का निरीक्षण करना नहीं है। अधिकारियों को विद्यालयों से जोड़कर नियमित निगरानी, विद्यार्थियों और अभिभावकों से संवाद तथा शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार पर जोर दिया जा रहा है।
(प्रतिक sigh की रिपोर्ट)


