
नालंदा: बिहार में आंगनवाड़ी केंद्रों के जरिए बच्चों की शुरुआती शिक्षा, पोषण और देखरेख को मजबूत करने की कोशिशों के बीच नालंदा के गिरियक प्रखंड से एक केंद्र की व्यवस्था को लेकर सवाल उठे हैं। चोरसुआ पश्चिमी स्थित आंगनवाड़ी केंद्र संख्या-94 में कर्मियों की कथित गैरमौजूदगी, बच्चों की उपस्थिति, राशन वितरण और साफ-सफाई को लेकर स्थानीय लोगों ने शिकायतें सामने रखी हैं।

पढ़ाई के समय सहायिका के मौजूद नहीं होने का आरोप
स्थानीय लोगों के अनुसार, केंद्र पर करीब 12 बच्चे मौजूद थे, लेकिन उस दौरान सहायिका रीता कुमारी केंद्र पर मौजूद नहीं थीं। सेविका अनीता कुमारी के भी उस समय केंद्र पर नहीं होने की बात सामने आई।

केंद्र पर रिपोर्टिंग के दौरान सेविका अनीता कुमारी कुछ सामान लेकर केंद्र की ओर आती दिखाई दीं। वहीं केंद्र में पढ़ने वाली बच्ची की मां मुन्नी कुमारी ने भी सहायिका के मौजूद नहीं होने की बात कही।
बिना आवेदन छुट्टी पर थीं सहायिका
मामले को लेकर सेविका अनीता कुमारी से सवाल किया गया। उन्होंने बताया कि सहायिका रीता कुमारी उस दिन केंद्र पर नहीं आई थीं। सेविका के अनुसार, सहायिका बिना आवेदन दिए छुट्टी पर थीं। हालांकि, सहायिका की अनुपस्थिति और छुट्टी से जुड़े रिकॉर्ड की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
राशन और उपस्थिति को लेकर भी शिकायतें
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि केंद्र की व्यवस्था को लेकर पहले भी शिकायतें सामने आती रही हैं। इनमें कथित तौर पर उपस्थिति दर्ज करने के बाद केंद्र से चले जाने, बच्चों की शत-प्रतिशत उपस्थिति दिखाने और राशन वितरण में अनियमितता के आरोप शामिल हैं।
कुछ लोगों ने आंगनवाड़ी के लिए आने वाले अनाज के कथित दुरुपयोग का भी आरोप लगाया है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और वास्तविक स्थिति विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है।
स्थानीय लोगों ने केंद्र की साफ-सफाई पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि केंद्र का शौचालय गंदा रहता है। छोटे बच्चों के लिए संचालित केंद्र में स्वच्छता व्यवस्था को लेकर शिकायतें सामने आने के बाद अभिभावकों ने निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।
CDPO से मांगा गया विभागीय पक्ष
पूरे मामले में विभाग का पक्ष जानने के लिए CDPO श्वेता कुमारी से फोन पर संपर्क किया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बातचीत के दौरान मामले पर स्पष्ट जवाब नहीं मिल सका और कॉल समाप्त हो गई। ऐसे में केंद्र में कर्मियों की उपस्थिति, बच्चों की वास्तविक संख्या, राशन वितरण और साफ-सफाई से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
मामले में मुख्य सवाल केंद्र पर कर्मियों की नियमित उपस्थिति, बच्चों की वास्तविक उपस्थिति और राशन वितरण के रिकॉर्ड से जुड़े हैं। यदि स्थानीय लोगों के आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो विभागीय स्तर पर जिम्मेदारी तय की जा सकती है।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर आरोपों को प्रमाणित तथ्य के रूप में नहीं कहा जा सकता। विभागीय जांच और संबंधित रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
(वीरेंद्र कुमार की रिपोर्ट)


