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पत्रकारों के हक में हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला!, पुलिस अधिकारी के बयान छापने पर नहीं चलेगा मुकदमा

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Ranchi: पत्रकारों की स्वतंत्रता और निष्पक्ष रिपोर्टिंग के अधिकारों को लेकर झारखंड हाईकोर्ट से बेहद अहम और ऐतिहासिक फैसला सामने आया है। अदालत ने साफ शब्दों में व्यवस्था दी है कि अगर कोई पत्रकार या रिपोर्टर किसी जिम्मेदार पुलिस अधिकारी द्वारा दिए गए आधिकारिक बयान के आधार पर खबर प्रकाशित करता है, तो उसे किसी भी हाल में आपराधिक रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। जस्टिस रंगोंन मुखोपाध्याय और जस्टिस अरुण कुमार राय की खंडपीठ ने देवघर के वरिष्ठ पत्रकार विमलेन्दु नारायण की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह ऐतिहासिक टिप्पणी की है।

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SDPO के बयान को प्रकाशित करने पर दर्ज हुआ था केस

यह पूरा मामला देवघर जिले के वरिष्ठ पत्रकार विमलेन्दु नारायण से जुड़ा हुआ है। पत्रकार ने एक मामले में अनुमंडल पुलिस अधिकारी यानी एसडीपीओ द्वारा दिए गए आधिकारिक बयान को समाचार पत्र में प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसके बाद पत्रकार के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करा दिया गया था, जिसे चुनौती देते हुए उन्होंने हाईकोर्ट की चौखट खटखटाई थी। अदालत ने मामले की बारीकी से समीक्षा करने के बाद पाया कि अपीलकर्ता केवल एक निष्पक्ष रिपोर्टर है, जिसने पुलिस अधिकारी के कहे शब्दों को ही जस का तस जनता तक पहुंचाया था।

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अधिकारी के बयान की रिपोर्टिंग करना पत्रकार का कर्तव्य

हाईकोर्ट की खंडपीठ ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि किसी जिम्मेदार सरकारी अधिकारी के आधिकारिक बयान को बिना तोड़-मरोड़ कर रिपोर्ट करना पत्रकार के मूल दायित्व और कर्तव्य का हिस्सा है। अदालत ने कहा कि पत्रकार द्वारा आधिकारिक बयानों की निष्पक्ष और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग करना किसी भी सूरत में आपराधिक दायित्व के दायरे में नहीं आता। ऐसे मामलों में खबर लिखने वाले संवाददाता पर कोई आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।

मनगढ़ंत बातें जोड़ने का कोई सबूत नहीं

अदालत ने पाया कि पत्रकार द्वारा छापी गई खबर पूरी तरह से संबंधित एसडीपीओ के बयान पर आधारित थी। रिपोर्टर ने अपनी तरफ से कोई भी भ्रामक, झूठा या मनगढ़ंत तथ्य नहीं जोड़ा था, बल्कि सिर्फ अधिकारी के बयान को पाठकों तक पहुंचाया था। जब पत्रकार ने अपनी तरफ से कोई गलत तथ्य पेश ही नहीं किया, तो उसके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई का कोई कानूनी आधार नहीं बनता। अदालत ने विमलेन्दु नारायण की अपील को स्वीकार करते हुए उन्हें बड़ी कानूनी राहत दी है और उनके खिलाफ दर्ज मामले को खारिज कर दिया है।

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