
Ranchi: राजधानी में प्रतियोगी छात्रों ने प्रतियोगी परीक्षाओं में व्यवस्थागत सुधार को लेकर सरकार के वादों पर अमल न होने पर कड़ा ऐतराज जताया है। छात्रों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर कहा कि पूर्व में हुए आंदोलन के समय सरकार ने अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में रिफॉर्म कमेटी गठित करने का भरोसा दिया था। करीब दो महीने का समय गुजर जाने के बावजूद अब तक इस कमेटी का गठन धरातल पर नहीं उतर सका है। छात्रों ने साफ किया कि अगर सरकार ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए, तो 7 अक्टूबर के बाद राज्य भर के छात्र एक बार फिर बड़े आंदोलन का रास्ता चुनने को मजबूर होंगे।

खाली पदों और परीक्षा कैलेंडर पर स्पष्टता की मांग
छात्र प्रतिनिधियों ने कहा कि राज्य के विभिन्न विभागों में बड़ी तादाद में सरकारी पद खाली पड़े हैं, लेकिन समय पर वैकेंसी और स्पष्ट परीक्षा कैलेंडर न होने से लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटका है। युवाओं को यह साफ पता होना चाहिए कि कौन सी परीक्षा किस तारीख को होगी, फॉर्म भरने की अंतिम तिथि क्या होगी और परिणाम कब तक आएंगे। इसके साथ ही छात्रों ने JPSC में लंबे समय से रिक्त पड़े अध्यक्ष और सदस्यों के पदों पर अविलंब नियुक्ति की मांग की, ताकि आयोग पूरी क्षमता के साथ काम कर सके और भर्तियां बेवजह न लटकें।

UPSC की तर्ज पर बने सिस्टम, प्रीलिम्स में ई-ऑप्शन और निगेटिव मार्किंग
छात्रों ने मांग उठाई कि JPSC को UPSC की तर्ज पर हर साल एक निश्चित वार्षिक परीक्षा कैलेंडर जारी करना चाहिए। इसमें प्रीलिम्स, मेन्स और इंटरव्यू की समय सीमा पहले से तय हो, ताकि प्रक्रिया सालों साल न खिंचे। प्रीलिम्स परीक्षा में ई-ऑप्शन जोड़ने, निगेटिव मार्किंग लागू करने और कैटेगरी के आधार पर कटऑफ व मार्कशीट जारी करने की मांग रखी गई। इसके अलावा अभ्यर्थियों ने यह भी कहा कि प्रारंभिक परीक्षा और मुख्य परीक्षा के बीच तैयारी के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए।
मेन्स परीक्षा पैटर्न, कॉपी जांच और इंटरव्यू से बाहर हुए छात्रों पर विचार
मुख्य परीक्षा के पैटर्न में बदलाव की वकालत करते हुए छात्रों ने कहा कि मेन्स से ऑब्जेक्टिव सवाल हटाकर शॉर्ट क्वेश्चन जोड़े जाएं और झारखंड विशेष के विषयों को प्राथमिकता मिले। क्षेत्रीय भाषाओं की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में पूरी पारदर्शिता बरती जाए, ताकि कोचिंग संस्थानों और जांचकर्ताओं के बीच किसी तरह का टकराव निष्पक्षता को प्रभावित न करे। छात्रों ने प्रस्तावित रिफॉर्म कमेटी में छात्र प्रतिनिधियों को भी शामिल करने की बात दोहराई। साथ ही यह मांग भी रखी कि जो अभ्यर्थी इंटरव्यू तक पहुंचकर मामूली अंतर से अंतिम चयन से चूक जाते हैं, उन्हें अन्य सरकारी पदों पर समायोजित करने की नीति पर काम हो, जैसा कि कई अन्य राज्यों में किया जा रहा है।


