
Sahibganj: साहिबगंज जिले के उधवा प्रखंड अंतर्गत राधानगर थाना क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध उधवा पक्षी अभ्यारण्य के प्रतिबंधित पतौड़ा झील इलाके में गुरुवार को मछली पकड़ने को लेकर भारी विवाद हो गया। देखते ही देखते विवाद ने हिंसक रूप ले लिया और ग्रामीणों ने वन विभाग के कार्यालय में जमकर तोड़फोड़ की। इस हिंसक टकराव में वनरक्षी अखिलेश मरांडी समेत करीब पांच वनकर्मी और दूसरी ओर से भी कई ग्रामीण चोटिल हुए हैं। हालात पर काबू पाने के लिए पुलिस ने एक युवक को हिरासत में लिया है।

प्रतिबंधित झील में मछली पकड़ने से रोकने पर शुरू हुआ विवाद
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गुरुवार को बागपिंजरा गांव के दो युवक नाव लेकर प्रतिबंधित पतौड़ा झील क्षेत्र में कथित तौर पर मछली पकड़ रहे थे। मौके पर तैनात वनरक्षी अखिलेश मरांडी और अन्य कर्मियों ने जब युवकों को अभ्यारण्य क्षेत्र में जाल डालने से रोका, तो दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हो गई। इसके बाद वनकर्मी दोनों युवकों को पूछताछ के लिए पतौड़ा झील स्थित विभागीय कार्यालय ले आए।

दफ्तर पहुंचे दर्जनों ग्रामीण, जमकर हुई तोड़फोड़
युवकों को पकड़े जाने की सूचना जैसे ही गांव में फैली, बागपिंजरा गांव से दर्जनों ग्रामीण लाठी-डंडों के साथ सीधे वन विभाग के कार्यालय पहुंच गए। वहां स्थिति तेजी से बिगड़ गई और उग्र भीड़ ने सरकारी कार्यालय पर हमला बोल दिया। इस दौरान खिड़कियों के शीशे, कुर्सियां, टेबल और परिसर में खड़ी कार के शीशे तोड़ दिए गए। शुरुआती आकलन के मुताबिक इस तोड़फोड़ में करीब एक लाख रुपये से अधिक की सरकारी संपत्ति का नुकसान हुआ है।
तीन थानों की फोर्स ने संभाला मोर्चा, एक युवक हिरासत में
कार्यालय पर हमले की सूचना मिलते ही राधानगर थाना प्रभारी अमर कुमार मिंज, राजमहल थाना प्रभारी हसनैन अंसारी, राजमहल इंस्पेक्टर राजीव रंजन और एसआई गुलनाज खातून भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने तत्काल हस्तक्षेप कर भीड़ को खदेड़ा और स्थिति को संभाला। पुलिस ने मौके से एक संदिग्ध युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।
दोनों पक्षों के अपने-अपने दावे
घटना में पकड़े गए युवक सलीम शेख ने आरोप लगाया है कि बाढ़ के चलते झील का दायरा बढ़ गया था और वनरक्षी ने ही कहा था कि झील से बाहर मछली पकड़ी जा सकती है। उसका दावा है कि वह अपनी रैयती जमीन की तरफ था, जहां वनकर्मियों ने उसके साथ बदसलूकी और मारपीट की। हालांकि, प्रशासनिक स्तर पर इस दावे की पुष्टि नहीं हुई है। दूसरी तरफ वन विभाग का कहना है कि प्रतिबंधित वन्यजीव क्षेत्र में अवैध शिकार रोकने पर सुनियोजित तरीके से कर्मियों पर हमला किया गया।
घायलों का अस्पताल में इलाज जारी, जांच में जुटी पुलिस
घटना में जख्मी वनकर्मियों और ग्रामीणों को इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल भेजा गया है। मामले पर रेंजर पंचम दुबे ने बताया कि घायल कर्मियों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है और सरकारी कार्य में बाधा डालने व हमला करने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। राधानगर पुलिस अब सरकारी संपत्ति को पहुंचे नुकसान का आकलन कर रही है और दोनों पक्षों की भूमिका की जांच के आधार पर प्राथमिकी दर्ज करने की तैयारी में है।


