
Digital Desk Naxatra Samachar: झारखंड के चर्चित JSSC CGL पेपर लीक 2024 मामले के मुख्य साजिशकर्ता संजीव कुमार उर्फ लूटन मुखिया की चालाकियों से अदालत का पारा चढ़ गया है। आरोपी लगातार कई तारीखों से अदालत में पुलिस पेपर लेने नहीं पहुंच रहा है। मामले की सुनवाई AJC योगेश कुमार की अदालत में चल रही है। पिछली सुनवाई के दौरान भी आरोपी न तो खुद कोर्ट में हाजिर हुआ और न ही उसके वकील की तरफ से गैरहाजिरी को लेकर कोई सूचना या अर्जी दी गई। आरोपी के इस रवैये के बाद उस पर कानूनी शिकंजा और सख्त होने के आसार बढ़ गए हैं।

DSP स्तर के अधिकारी कर रहे हैं जांच, नामकुम थाने में दर्ज हुआ था केस
राज्य भर में 28 जनवरी 2024 को आयोजित झारखंड कर्मचारी चयन आयोग यानी JSSC की कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल (CGL) परीक्षा में भारी धांधली और पेपर लीक का मामला सामने आया था। इस बाबत आयोग की अधिकारी मधुमिता कुमारी की लिखित तहरीर पर रांची के नामकुम थाने में अज्ञात गिरोह के खिलाफ FIR दर्ज कराई गई थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरे केस की जांच DSP रैंक के अफसर को सौंपी गई। तफ्तीश के दौरान पुख्ता सबूत मिलने पर संजीव कुमार उर्फ लूटन मुखिया को मुख्य आरोपी के रूप में दबोचा गया था, जिसके बाद से उस पर कानूनी ट्रायल चल रहा है।

परीक्षा के बीच आयोग की आधिकारिक मेल पर आ गए थे उत्तर
FIR में दर्ज ब्योरे के मुताबिक 28 जनवरी को प्रदेश के सभी जिलों में बनाए गए 735 सेंटरों पर तीन पालियों में परीक्षा ली जा रही थी। उसी दिन दोपहर 02:32 बजे और फिर 02:38 बजे आयोग की ऑफिशियल ईमेल आईडी पर एक अनजान पते से दो चौंकाने वाले ईमेल आए। 02:38 बजे आए ईमेल के साथ चार पन्नों की एक फाइल अटैच थी, जिसमें तीसरी पाली यानी सामान्य ज्ञान (GK) के सवालों के सही विकल्प सिलसिलेवार तरीके से लिखे हुए थे। शाम को जब परीक्षा खत्म होने के बाद असली प्रश्न पत्र से उन जवाबों का मिलान कराया गया, तो 150 में से ज्यादातर सवालों के जवाब पूरी तरह मेल खा गए। आयोग के होश उड़ गए और बिना देर किए 28 जनवरी की तीसरी पाली की परीक्षा को फौरन रद्द घोषित कर दिया गया था।
आउटसोर्सिंग एजेंसी के भीतर से सेंधमारी का बड़ा शक
आयोग ने पुलिस को दिए आवेदन में साफ किया था कि परीक्षा फॉर्म भरवाने से लेकर परीक्षा कराने, सवाल चुनने, पेपर छापने और जिलों के ट्रेजरी तक सीलबंद बॉक्स पहुंचाने की पूरी जिम्मेदारी एक प्राइवेट आउटसोर्सिंग एजेंसी के पास थी। परीक्षा खत्म होने तक आयोग के किसी भी कर्मचारी या बड़े अधिकारी को सवालों की कोई भनक नहीं होती। 28 जनवरी की परीक्षा के लिए एजेंसी ने 22 और 23 जनवरी को रांची कोषागार में सीलबंद बक्से जमा कराए थे, जहां से इन्हें विभिन्न जिलों के सेंटरों पर भेजा गया था। किसी भी सेंटर से सील टूटने की शिकायत नहीं आई थी, जिससे साफ अंदेशा है कि आउटसोर्सिंग एजेंसी या डिजिटल स्तर पर मिलीभगत कर पेपर लीक के इस महाघोटाले को अंजाम दिया गया था।


