
Jharkhand High Court : झारखंड में ग्रामीण विकास विभाग द्वारा बनाए गए कई पुल-पुलियों के अचानक गिर जाने और दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई न होने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट ने सुनवाई पूरी कर ली है। चीफ जस्टिस एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है। इसके साथ ही अदालत ने राज्य सरकार और याचिकाकर्ता के वकीलों को 5 अक्टूबर तक अपनी दलीलों के लिखित नोट (Brief Notes) कोर्ट में जमा करने का आदेश दिया है।

CBI और ED से जांच कराने की मांग
याचिकाकर्ता पंकज कुमार यादव की ओर से दायर इस जनहित याचिका में राज्य के अलग-अलग जिलों में हाल ही में गिरे पुल-पुलियों की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच केंद्रीय एजेंसियों जैसे सीबीआई (CBI) और ईडी (ED) से कराने की गुहार लगाई गई है। प्रार्थी पक्ष का आरोप है कि ग्रामीण विकास विभाग के निर्माण कार्यों में बड़े पैमाने पर वित्तीय धांधली, अनियमितता और भ्रष्टाचार हुआ है, जिसके कारण घटिया गुणवत्ता वाले पुल पहली ही बारिश या अचानक ढह गए।

‘दोषी ठेकेदार ब्लैकलिस्ट हुए, कार्रवाई जारी’: सरकार की सफाई
दूसरी तरफ, सुनवाई के दौरान राज्य सरकार का पक्ष रखते हुए अधिवक्ता विभोर मयंक ने अदालत को बताया कि सरकार इन घटनाओं और हादसों को लेकर पूरी तरह गंभीर है। उन्होंने कोर्ट को आश्वस्त किया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कई सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं। साथ ही, निर्माण कार्य में लापरवाही बरतने वाले दोषी अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई की गई है और संबंधित ठेकेदारों व ब्लैकलिस्टेड एजेंसियों को काली सूची में डाल दिया गया है।


