
Jharkhand High Court : गिरिडीह के सब-रजिस्ट्रार बालेश्वर पटेल की हत्या के मामले में जेल में बंद आरोपी हेमंत पांडेय को झारखंड हाईकोर्ट से राहत मिली है। हाईकोर्ट ने उसकी जमानत याचिका मंजूर करते हुए सशर्त जमानत देने का आदेश दिया है।

जस्टिस एके चौधरी की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किया। अदालत ने हेमंत पांडेय को 25 हजार रुपये के दो निजी मुचलके जमा करने पर जमानत की सुविधा देने का निर्देश दिया है।

जमानत के साथ हाईकोर्ट ने रखीं शर्तें
हाईकोर्ट ने जमानत देते हुए आरोपी के सामने कुछ शर्तें भी रखी हैं। उसे ट्रायल के दौरान अदालत की कार्यवाही में पूरा सहयोग करना होगा।
इसके साथ ही वह मामले से जुड़े किसी भी गवाह को प्रभावित या परेशान करने की कोशिश नहीं करेगा। इन शर्तों का पालन करते हुए ही उसे जमानत का लाभ मिलेगा।
बचाव पक्ष ने कोर्ट में क्या दी दलील?
हेमंत पांडेय की तरफ से अधिवक्ता अनिल कुमार सिंह महाराणा ने हाईकोर्ट में पक्ष रखा।
बचाव पक्ष ने दलील दी कि जमीन विवाद से जुड़े संदेह के आधार पर हेमंत पांडेय को इस मामले में आरोपी बनाया गया है। वकील ने कोर्ट में यह भी कहा कि घटनास्थल पर हेमंत की मौजूदगी का कोई आरोप नहीं है।
बचाव पक्ष ने यह दलील भी रखी कि हेमंत पांडेय का कोई पूर्व आपराधिक इतिहास नहीं है और वह 6 जुलाई से न्यायिक हिरासत में था।
30 जून को हुआ था खूनी विवाद
मामला 30 जून 2026 का है। रामगढ़ जिले के मांडू थाना क्षेत्र की रबोध पंचायत स्थित पेसरा कंडी गांव में जमीन की खरीद-बिक्री से जुड़े पुराने विवाद को लेकर हिंसक झड़प हुई थी।
इस घटना में गिरिडीह के सब-रजिस्ट्रार बालेश्वर पटेल गंभीर रूप से घायल हो गए थे। बाद में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई थी।
मांडू थाने में दर्ज हुआ था हत्या का मामला
घटना के बाद मांडू थाने में कांड संख्या 151/2026 दर्ज किया गया था। पुलिस ने मामले की जांच के दौरान हेमंत पांडेय की संलिप्तता का आरोप लगाते हुए उसे गिरफ्तार किया था।
इसके बाद से वह न्यायिक हिरासत में था। अब हाईकोर्ट ने उसकी जमानत याचिका स्वीकार कर ली है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद हेमंत पांडेय को निर्धारित शर्तें पूरी करने पर जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हुआ है। हालांकि जमानत मिलने का अर्थ मामले से बरी होना नहीं है।


