
Yusuf Pathan: मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ दिए जाने की मांग को लेकर छिड़े सियासी घमासान के बीच बहरामपुर से सांसद यूसुफ पठान का बड़ा बयान सामने आया है। यूसुफ पठान ने इस मांग से पूरी तरह किनारा करते हुए स्पष्ट किया है कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ऐसा कोई पत्र नहीं लिखा है और न ही किसी सिफारिश पर हस्ताक्षर किए हैं।

‘एक्स’ (X) पर जताई नाराजगी, पत्र सार्वजनिक करने की मांग
यूसुफ पठान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी बात रखते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल, मुर्शिदाबाद, बहरामपुर और पूरे देश में लोग अपने मताधिकार और लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसे माहौल में वे किसी पुरस्कार की सिफारिश क्यों करेंगे? उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि अगर उनके नाम का इस्तेमाल कर कोई पत्र या सिफारिश सामने लाई जा रही है, तो उसकी वास्तविक प्रति तुरंत सार्वजनिक की जानी चाहिए, अन्यथा इसे फर्जी और उनके नाम का दुरुपयोग माना जाएगा।

NCPI अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री को लिखा था पत्र
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ज्योति प्रकाश चटर्जी ने 30 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भेजा था। उस पत्र में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव और मतदाता सूचियों के संशोधन (SIR) प्रक्रिया के निष्पक्ष संचालन का हवाला देते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भारत रत्न देने का अनुरोध किया गया था।
तृणमूल से अलग हुए गुट और सांसद की राय में दिखा विरोधाभास
उल्लेखनीय है कि यूसुफ पठान समेत तृणमूल कांग्रेस (TMC) से अलग हुए कई पूर्व व वर्तमान सांसद एनसीपीआई (NCPI) से जुड़े हुए हैं। ऐसे में पार्टी अध्यक्ष की मांग और सांसद यूसुफ पठान के कड़े रुख से यह स्पष्ट हो गया है कि इस संवेदनशील मुद्दे पर पार्टी के भीतर भारी मतभेद और विरोधाभास की स्थिति बनी हुई है।


