
Ranchi News : राजधानी रांची के पॉश इलाके अशोक नगर रोड नंबर-1 में रास्ते को लेकर एक वरिष्ठ IPS अधिकारी और स्थानीय निवासी के बीच उपजा विवाद अब प्रशासनिक व सियासी स्तर पर बेहद गर्मा गया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के संज्ञान में मामला पहुंचने के महज 24 घंटे के भीतर जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की है। रांची सदर अनुमंडल दंडाधिकारी (SDO) ने तत्काल प्रभाव से धारा 166 के तहत आदेश जारी कर विवादित स्थल पर चल रहे बाउंड्री वॉल निर्माण को रुकवा दिया है। इसके बाद मौके पर पहुंचे प्रशासनिक अमले और पुलिस ने जारी काम को पूरी तरह बंद करा दिया।



शनिवार सुबह शुरू हुआ था बाउंड्री व पिलर निर्माण, प्रशासन ने रुकवाया
शिकायतकर्ता पत्रकार सैयद शरीफ इब्राहिम के अनुसार, शनिवार सुबह रेल DIG सह IPS अधिकारी आलोक प्रियदर्शी की ओर से मजदूर लगाकर रास्ते वाले हिस्से पर बाउंड्री वॉल और कंक्रीट पिलर लगाने का काम तेजी से शुरू कराया गया था। इसकी भनक लगते ही प्रशासनिक स्तर पर हलचल मच गई। दोपहर के बाद अरगोड़ा अंचल के सीओ (CO) और अरगोड़ा थाने की पुलिस भारी बल के साथ मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने SDO कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए चल रहे निर्माण कार्य को तत्काल बंद करने का निर्देश दिया और मजदूरों को वहां से हटा दिया।
5 दशकों से आवागमन का दावा, गेट पर गाड़ी खड़ी कर बंधक बनाने का आरोप
मुख्यमंत्री सचिवालय (प्राप्ति तिथि 29 सितंबर 2026), डीजीपी और उपायुक्त को सौंपे गए शिकायती पत्रों में सैयद शरीफ इब्राहिम ने विस्तार से अपनी बात रखी है। उनका कहना है कि उनका परिवार वर्ष 1963 से इस जमीन पर काबिज है और 1991 में आरआरडीए (RRDA) से स्वीकृत नक्शे में भी अशोक नगर रोड नंबर-1 की 40 फीट सड़क से उनके परिसर तक पहुंचने वाले मार्ग का स्पष्ट उल्लेख है। इस कंपाउंड में पांच अलग-अलग मकानों में छह परिवार रहते हैं। आरोप है कि 28 सितंबर की शाम उनके मुख्य निकास द्वार पर कथित तौर पर एक सरकारी स्कॉर्पियो (JH01CC 2556) जानबूझकर अड़ा दी गई, जिससे परिवारों की आवाजाही ठप हो गई और वे अपने ही घरों में बंधक बन गए। विरोध करने पर वर्दी का धौंस दिखाने, एके-47 से गोली मारने की धमकी देने और झूठे मुकदमों में फंसाने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
द इंडियन ईजमेंट्स एक्ट का हवाला, निष्पक्ष जांच की मांग

शिकायतकर्ता ने आवेदन में ‘द इंडियन ईजमेंट्स एक्ट, 1882’ (The Indian Easements Act, 1882) का उल्लेख करते हुए कहा है कि दशकों से इस्तेमाल हो रहे रास्ते के अधिकार को जबरन छीना नहीं जा सकता। उन्होंने मुख्यमंत्री, डीजीपी और जिला प्रशासन से आग्रह किया है कि राजस्व और नगर निकाय के मूल नक्शों व अभिलेखों की निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि आम नागरिकों की सुरक्षा और उनके वैधानिक आवागमन के अधिकार की रक्षा हो सके।
‘वर्दी के घमंड में सार्वजनिक रास्ते को जागीर न समझें’, बाबूलाल मरांडी

इस संवेदनशील मामले में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने भी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर पीड़ित परिवार की सुरक्षा और निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं सोशल मीडिया पर तीखा हमला बोलते हुए बाबूलाल मरांडी ने कहा कि अगर किसी अधिकारी को वहां सुरक्षा का खतरा महसूस होता है, तो वे वह घर बेचकर किसी अन्य सुरक्षित स्थान पर चले जाएं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिस रास्ते का इस्तेमाल जनता 1964 से कर रही है, वह अफसर के आने के बाद अचानक ‘सुरक्षा खतरा’ कैसे बन गया? वर्दी और पद की धौंस में सार्वजनिक अधिकारों को निजी जागीर समझना समझदारी नहीं है। फिलहाल SDO के आदेश के बाद मौके पर तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और दोनों पक्षों के कागजातों की जांच की तैयारी चल रही है।


