
Ranchi Crime News: एक भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अधिकारी से आम अवाम को न्याय, निष्पक्षता और कानून के सम्मान की सबसे ज्यादा उम्मीद होती है। लेकिन जब कानून के सबसे बड़े रखवालों पर ही खाकी की हनक दिखाने और अदालती आदेशों को दरकिनार करने के संगीन आरोप लगने लगें, तो व्यवस्था से जनता का भरोसा डगमगाने लगता है। राजधानी रांची के पॉश इलाके अशोक नगर रोड नंबर-1 में वर्षों पुराने रास्ते को लेकर वरिष्ठ IPS अधिकारी व रेल DIG आलोक प्रियदर्शी और पत्रकार सैयद शरीफ इब्राहिम के बीच छिड़ा विवाद अब सोशल मीडिया पर आम लोगों के भारी आक्रोश की वजह बन गया है। इंटरनेट पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि जो वरिष्ठ पुलिस अफसर अपने पड़ोसियों के साथ बुनियादी नागरिक संबंध और कानून का दायरा नहीं बनाए रख पा रहा, वह आम जनता के अधिकारों की रक्षा कैसे करेगा? आरोप लग रहे हैं कि एक IPS अधिकारी को न तो अपने महकमे के वरीय अफसरों का भय है, न अदालती फरमान का और न ही सरकार व मुख्यमंत्री का।



SDM कोर्ट के आदेश को ठेंगा, रात के अंधेरे में गेट पर गिराए ईंट-बोल्डर
मामला उस वक्त और ज्यादा गंभीर हो गया जब एसडीएम सदर रांची की अदालत से मिले शांति व्यवस्था बनाए रखने के स्पष्ट निर्देश के बावजूद कथित तौर पर बीती रात पीड़ित परिवार के घर का रास्ता पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया गया। पत्रकार सैयद शरीफ इब्राहिम ने अरगोड़ा थाना प्रभारी को दिए नए आवेदन में बताया है कि रास्ते के विवाद को लेकर पूर्व में DC और SDM को शिकायतें दी गई थीं। इसके बाद अंचल अधिकारी की जांच रिपोर्ट के आधार पर SDM सदर की अदालत में वाद संख्या M-2842/2026 दर्ज हुआ था। पूर्व में गेट से 15 फीट दूर खड़ी की जा रही चारदीवारी को प्रशासन के दखल के बाद रोका गया था और अदालत ने विवादित स्थल पर यथास्थिति और शांति बनाए रखने का निर्देश दिया था। लेकिन आरोप है कि रात के सन्नाटे में जानबूझकर गेट के सामने ईंटों की दीवार खड़ी कर दी गई और उसके आगे भारी-भरकम पत्थर के बोल्डर रख दिए गए, जिससे घर के अंदर से निकलना तक मुहाल हो गया है।

1963 से बसावट और RRDA का नक्शा, ईजमेंट्स एक्ट के उल्लंघन का आरोप
शिकायतकर्ता ने कानूनी दस्तावेजों के हवाले से बताया है कि उनका परिवार वर्ष 1963 से इस जमीन पर रह रहा है और पिछले छह दशकों से इसी रास्ते का इस्तेमाल होता आ रहा है। वर्ष 1991 में रांची रीजनल डेवलपमेंट अथॉरिटी (RRDA) से स्वीकृत नक्शे में भी अशोक नगर रोड नंबर-1 की 40 फीट चौड़ी सड़क से उनके आवास तक 12 फीट का पहुंच मार्ग साफ तौर पर दर्ज है। वर्षों तक अशोक नगर हाउसिंग को-ऑपरेटिव सोसाइटी ने भी इस पर कभी कोई ऐतराज नहीं जताया। आरोप लगाया गया है कि बगल में रहने वाले रेल DIG इस सार्वजनिक रास्ते को अपने निजी परिसर में मिलाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि उनके अपने बंगले का मुख्य निकास दूसरी तरफ खुलता है। पीड़ित ने इसे इंडियन ईजमेंट्स एक्ट, 1882 के तहत मिले बुनियादी आवागमन के अधिकार पर खुला डाका करार दिया है।
सरकारी गाड़ी से नाकेबंदी और हथियार से धमकाने का आरोप
अरगोड़ा थाने में दिए गए पत्र में पत्रकार ने पहले घटित घटनाक्रम को भी दोहराया है। आरोप के मुताबिक 29 सितंबर की शाम करीब छह बजे सरकारी स्कॉर्पियो (JH01CC 2556) को गेट के ठीक सामने खड़ा कर परिवार का निकलना बंद कर दिया गया था। विरोध करने पर आरोप है कि DIG अपने अंगरक्षकों के साथ पहुंचे और कथित तौर पर सर्विस वेपन का भय दिखाते हुए फर्जी मुकदमों में फंसाकर जेल भेजने और गोली मारने की धमकी दी। इस दौरान परिवार और मासूम बच्चों के सामने धार्मिक पहचान को लेकर भी अशोभनीय टिप्पणियां करने का आरोप लगाया गया है।
BNS की धारा 223 के तहत कार्रवाई की मांग
पत्रकार सैयद शरीफ इब्राहिम ने अरगोड़ा पुलिस से अविलंब मौके पर पहुंचकर गेट के सामने डंप किए गए भारी बोल्डरों और ईंटों को हटवाकर आवागमन बहाल कराने की गुहार लगाई है। साथ ही मांग की है कि सक्षम न्यायालय (SDM कोर्ट) के आदेश की जानबूझकर अवहेलना करने के जुर्म में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 के तहत प्राथमिकी दर्ज कर विधिक कार्रवाई की जाए। हालांकि, यह पूरा घटनाक्रम फिलहाल शिकायतकर्ता द्वारा थाने में दिए गए लिखित आवेदन और आरोपों पर आधारित है। मामले की निष्पक्ष जांच और संबंधित IPS अधिकारी या पुलिस मुख्यालय का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही विवाद की पूरी कानूनी स्थिति साफ हो सकेगी।


