
पटना: बिहार विधान परिषद की 8 सीटों पर होने वाले चुनाव से पहले महागठबंधन के भीतर सीट बंटवारे को लेकर खींचतान तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से कुमर राय को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है। खास बात यह है कि गठबंधन की शुरुआती सहमति में यह सीट कांग्रेस के हिस्से में मानी जा रही थी। ऐसे में RJD के इस फैसले से दोनों दलों के बीच तनाव और बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।

दरभंगा सीट पर RJD ने कांग्रेस के सामने उतारा उम्मीदवार
RJD की ओर से कुमर राय को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद दरभंगा शिक्षक सीट पर मुकाबला दिलचस्प हो गया है। गठबंधन की शुरुआती व्यवस्था के अनुसार यह सीट कांग्रेस के लिए छोड़ी गई थी। वहीं, अब RJD के उम्मीदवार उतारने से दोनों सहयोगी दलों के बीच सीधे चुनावी मुकाबले की स्थिति बनती दिख रही है।

विधान परिषद चुनाव में शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में स्थानीय समीकरण, शिक्षक संगठनों का समर्थन और उम्मीदवार की व्यक्तिगत पकड़ अहम भूमिका निभाती है। ऐसे में दोनों दलों के आमने-सामने आने का असर चुनावी नतीजों पर भी पड़ सकता है।
कांग्रेस के फैसले से नाराज हुआ RJD
दरअसल, विधान परिषद चुनाव को लेकर RJD ने पहले छह उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की थी। गठबंधन की शुरुआती सहमति में दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र कांग्रेस के हिस्से में और तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र CPI के हिस्से में जाने की बात सामने आई थी।
इसी बीच कांग्रेस ने विधान परिषद चुनाव के लिए पांच उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी। RJD ने कांग्रेस के इस फैसले पर नाराजगी जताई और इसे गठबंधन की भावना के विपरीत माना। इसके बाद RJD ने दरभंगा शिक्षक सीट से कुमर राय को मैदान में उतार दिया। इस घोषणा के साथ विधान परिषद चुनाव के लिए RJD के घोषित उम्मीदवारों की संख्या बढ़कर सात हो गई है।
क्या एक सीट से बिगड़ जाएगा महागठबंधन का समीकरण?
दरभंगा शिक्षक सीट का विवाद अब महज उम्मीदवार उतारने तक सीमित नहीं माना जा रहा है। राजनीतिक तौर पर यह महागठबंधन के भीतर चल रही खींचतान का संकेत भी माना जा रहा है।
सवाल यह है कि जब गठबंधन के दो प्रमुख दल एक ही सीट पर आमने-सामने होंगे, तो चुनाव में साझा रणनीति किस तरह काम करेगी। दोनों दलों के स्थानीय कार्यकर्ताओं और नेताओं के लिए भी एक-दूसरे के खिलाफ प्रचार करना राजनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण होगा।
तिरहुत सीट पर भी नजर
दरभंगा के बाद अब तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र पर भी सबकी नजर है। शुरुआती सीट बंटवारे के मुताबिक यह सीट CPI के हिस्से में थी। दरभंगा में RJD के उम्मीदवार उतारने के बाद यह देखना अहम होगा कि गठबंधन के अन्य घटक दलों के बीच सीटों को लेकर क्या स्थिति बनती है। अगर दूसरे निर्वाचन क्षेत्रों में भी सहयोगी दलों के बीच सीधा मुकाबला होता है, तो विधान परिषद चुनाव महागठबंधन के लिए बड़ी राजनीतिक परीक्षा बन सकता है।
फिलहाल कुमर राय की उम्मीदवारी ने बिहार की सियासत में हलचल बढ़ा दी है। सीट बंटवारे को लेकर शुरू हुई नाराजगी अब चुनावी मैदान तक पहुंच चुकी है। आने वाले दिनों में RJD और कांग्रेस के बीच इस विवाद को सुलझाने के लिए कोई बातचीत होती है या दोनों दल अलग-अलग चुनाव लड़ते हैं, इस पर सभी की नजर रहेगी।


