
Political news: झारखंड में प्रशासनिक व्यवस्था और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर करारा हमला बोला है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक लंबा पोस्ट लिखकर मरांडी ने राज्य सरकार के कामकाज के तौर-तरीकों पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने मुख्यमंत्री को सलाह दी कि वे अपने अहंकार को छोड़कर शांत मन से यह सोचें कि उनके शासन में राज्य की व्यवस्था किस कदर चरमरा गई है। उन्होंने सरकार से अपील की कि समय रहते सुधार करें ताकि जनता के बीच सरकार और कानून पर भरोसा बना रहे।

जमीन, शराब और पत्थर घोटाले का दिया हवाला
बाबूलाल मरांडी ने अपने बयान में राज्य में चर्चा में रहे बड़े घोटालों का सिलसिलेवार जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जमीन घोटाले में खुद मुख्यमंत्री के खिलाफ आरोप तय हो चुके हैं। इसके अलावा ईडी (ED) अधिकारियों पर दर्ज कराए गए एससी-एसटी मामले को हाईकोर्ट द्वारा खारिज कर जुर्माना लगाने की बात भी सामने आ चुकी है। शराब नीति विवाद का जिक्र करते हुए मरांडी ने कहा कि एसीबी (ACB) ने अपनी ही अदालत में दावा किया है कि नीति बदलने के बदले 50 करोड़ रुपये की रिश्वत ली गई। वहीं साहिबगंज के पत्थर खनन मामले में भी अदालत के आदेश पर सीबीआई (CBI) जांच चल रही है, जिसमें मुख्यमंत्री के प्रभाव के गलत इस्तेमाल की बात आई थी।

‘छात्रों को माफिया कहा, अब करीबी ही कटघरे में’ — पेपर लीक पर घेरा
नौकरियों की परीक्षाओं में गड़बड़ी और पेपर लीक के मुद्दे पर भी बाबूलाल मरांडी ने सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि पहले जब छात्र सड़क पर उतरते थे तो उन्हें माफिया बता दिया जाता था, लेकिन आज अदालत के सामने ऐसे साक्ष्य आ रहे हैं कि सत्ता से जुड़े लोगों ने पैसे लेकर इंटरव्यू में नंबर बढ़ाए। मरांडी ने सवाल किया कि जब मुख्यमंत्री अपने करीबी अफसरों और चहेतों को लूट-खसोट से रोक सकते थे, तो उन्होंने ऐसा क्यों नहीं किया? इसके चलते कई ईमानदार अधिकारियों का करियर दांव पर लग गया और सरकारी संस्थाओं की साख पूरी तरह मिट्टी में मिल गई।
लालू और ममता का नाम लेकर चेताया, कहा- सत्ता हमेशा नहीं रहती
मरांडी ने पड़ोसी राज्यों की राजनीति का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री को लालू प्रसाद यादव और ममता बनर्जी के राजनीतिक हालात से सबक लेने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि जब तक इंसान कुर्सी पर होता है, उसे सत्ता की ताकत और घमंड बहुत आसान लगता है, लेकिन सत्ता जाते ही वही घमंड जिंदगी का सबसे बड़ा बोझ बन जाता है। उन्होंने कहा कि राज्य के बालू, पत्थर और कोयले जैसे कीमती संसाधनों की लूट बंद होनी चाहिए और इनका फायदा आम जनता, विकास और नौजवानों के रोजगार में होना चाहिए। थानों और प्रखंड कार्यालयों में फैले घूसखोरी के दीमक को खत्म करने के लिए सरकार को कड़े कदम उठाने होंगे।


