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डेहरी में राष्ट्रीय युवा इतिहासकार राष्ट्रीय संगोष्ठी का आगाज, 200 से अधिक इतिहासकार और शोधार्थी जुटे

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रोहतास: डेहरी प्रखंड के जमुहार स्थित गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय में दशम युवा इतिहासकार राष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य शुभारंभ हुआ। ‘इतिहास लेखन की भारतीय परम्परा’ विषय पर आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में देशभर से 200 से अधिक इतिहासकार, शोधार्थी और शिक्षाविद शामिल हुए।

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उद्घाटन सत्र में जुटे कई दिग्गज

विश्वविद्यालय के देव मंगल सभागार में आयोजित उद्घाटन सत्र की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई। कार्यक्रम में बिहार सरकार के उच्च शिक्षा एवं विधि मंत्री संजय सिंह टाइगर मुख्य अतिथि और शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए।

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इस मौके पर विश्वविद्यालय के कुलपति एवं पूर्व सांसद गोपाल नारायण सिंह, कुलसचिव, इतिहास संकाय के अध्यक्ष, औरंगाबाद विधायक त्रिविक्रम नारायण सिंह, ईश्वर शरण विश्वकर्मा, डॉ. विकास कुमार सिंह, प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह समेत कई वरिष्ठ इतिहासकार और शिक्षाविद मौजूद रहे।

वक्ताओं ने भारतीय इतिहास को भारतीय दृष्टिकोण से देखने और लिखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इतिहास लेखन में भारतीय स्रोतों, परंपराओं, वेदों, पुराणों और लोक परंपराओं को भी उचित स्थान मिलना चाहिए।

पहले दिन 200 से अधिक शोध-पत्र प्रस्तुत

उद्घाटन सत्र के बाद संगोष्ठी में आठ तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। इनमें युवा शोधार्थियों ने भारतीय इतिहास लेखन की परंपरा, प्राचीन ऐतिहासिक स्रोत, भारतीय इतिहास-बोध, इतिहास-दृष्टि और समकालीन इतिहास लेखन की चुनौतियों जैसे विषयों पर अपने शोध प्रस्तुत किए।

पहले दिन ही 200 से अधिक शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए। शोधार्थियों ने इस बात पर भी चर्चा की कि भारतीय इतिहास की परंपरा को केवल राजाओं और युद्धों तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता।

भारतीय इतिहास-दृष्टि पर होगा व्यापक विमर्श

आयोजकों के अनुसार संगोष्ठी का उद्देश्य भारतीय इतिहास लेखन की समृद्ध परंपरा और स्वदेशी इतिहास-दृष्टि पर व्यापक अकादमिक विमर्श को बढ़ावा देना है। अगले दो दिनों तक भी विभिन्न तकनीकी सत्रों में शोध-पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे।

बिहार सरकार के उच्च शिक्षा एवं विधि मंत्री, संजय सिंह टाइगर ने कहा कि गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय ने इतिहास के क्षेत्र में एक बड़ा मंच उपलब्ध कराया है। यह संगोष्ठी युवा इतिहासकारों को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार उच्च शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।

(विकाश चंदन की रिपोर्ट)

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