
Justice Rohinton Fali Nariman: सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस रोहिंटन फली नरीमन ने देश के चुनाव आयोग के कामकाज पर खुलकर अपनी बात रखी है। राजकोट में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि आज आम नागरिक का वोट देने का बुनियादी अधिकार भारी खतरे में दिख रहा है। उनका कहना था कि देश एक ऐसे चुनाव आयोग को बर्दाश्त नहीं कर सकता जो अपने नियमों और जिम्मेदारियों को ठीक से न निभाए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से इस पूरे मामले में तुरंत दखल देने की अपील की है।

वोटर लिस्ट से नाम हटने और बंगाल चुनाव का मामला उठाया
जस्टिस नरीमन ने हालिया मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि वोटर लिस्ट में किसके नाम जोड़े जाएं और किसके काटे जाएं, इसे लेकर खुद चुनाव आयोग के भीतर ही मतभेद सामने आए हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां लगभग 90 लाख लोगों को वोट डालने के अधिकार से दूर कर दिया गया था। इनमें से करीब 22 लाख लोगों ने फैसले को चुनौती दी, जिनमें से सुनवाई के बाद 93 प्रतिशत लोगों के हक में फैसला आया। उनका कहना था कि इतने बड़े पैमाने पर लोगों को मतदान से रोकना लोकतंत्र की मूल भावना के खिलाफ है।

आयोग के भीतर 14 बार आपत्तियों की बात सामने आई
पूर्व जस्टिस ने कहा कि खबरों के अनुसार मुख्य चुनाव आयुक्त के फैसलों पर साथ काम कर रहे बाकी दोनों आयुक्तों ने करीब 14 बार सवाल उठाए। लेकिन उन्होंने कानून के तहत अपने बहुमत वाले अधिकार का इस्तेमाल कर उन फैसलों को नहीं रोका। उन्होंने हाल ही में तीनों अधिकारियों के बीच सहमति बनने और पुराने फॉर्म 6 पर लौटने की खबरों का जिक्र करते हुए कहा कि इस तरह के अंदरूनी विवादों से जनता के बीच संस्था की साख को नुकसान पहुंचता है।
चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पर जताई चिंता
जस्टिस नरीमन ने साल 2023 में बने नए कानून पर भी सवाल उठाए। उन्होंने याद दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले में निष्पक्षता बनाए रखने के लिए चयन समिति में प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और देश के मुख्य न्यायाधीश को रखने की बात कही थी। लेकिन केंद्र सरकार ने नया कानून बनाकर चीफ जस्टिस की जगह एक केंद्रीय मंत्री को शामिल कर दिया, जिससे सरकार का पलड़ा भारी हो जाता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ जल्द इस कानून पर विचार करेगी ताकि चुनाव आयोग की निष्पक्षता पूरी तरह कायम रह सके।


