
Jharkhand High Court: रांची में जमीन विवादों को लेकर कानूनी प्रक्रिया काफी सख्त हो चुकी है। राजधानी के खादगढ़ा इलाके से जुड़े चर्चित जमीन मामले में याचिकाकर्ता महादेव उरांव को झारखंड हाईकोर्ट से बड़ी निराशा हाथ लगी है। सिंगल बेंच के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने पाया कि याचिकाकर्ता ने अदालत से कई अहम बातें छिपाई थीं। अदालत ने अपील को पूरी तरह खारिज करते हुए साफ किया कि न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता जरूरी है।

करोड़ों के लेन-देन और जमीन का पेंच
यह पूरा मामला खादगढ़ा स्थित लगभग 38.25 डिसमिल जमीन से जुड़ा हुआ था। याचिकाकर्ता की ओर से इसे मुंडारी प्रकृति की जमीन बताकर उस पर दखल दिलाने की मांग की गई थी। हालांकि सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि इस जमीन के बदले पहले ही 1.08 करोड़ रुपये लिए जा चुके थे। इतनी बड़ी रकम का लेन-देन होने के बाद भी यह जानकारी अदालत के सामने नहीं रखी गई थी।

12 लाख रुपये का जुर्माना रहेगा लागू
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि सिंगल बेंच के फैसले में कोई कानूनी खामी नहीं है। इसी वजह से खंडपीठ ने पूर्व के आदेश में किसी भी तरह का बदलाव करने से इनकार कर दिया। इसके साथ ही सिंगल बेंच द्वारा याचिकाकर्ता पर लगाया गया 12 लाख रुपये का जुर्माना भी जस का तस प्रभावी रहेगा। अदालत के इस फैसले से यह साफ संदेश गया है कि गलत जानकारी के आधार पर राहत की उम्मीद नहीं की जा सकती।
ED और CID की जांच का दायरा
रांची के विभिन्न इलाकों में हुए जमीन सौदों को लेकर अब जांच एजेंसियां भी पूरी तरह सक्रिय हैं। वित्तीय लेन-देन और मनी ट्रेल की पड़ताल में ED जुटी हुई है, जबकि दस्तावेजों में गड़बड़ी और फर्जी रजिस्ट्री के नेटवर्क की जांच CID कर रही है। दोनों ही एजेंसियां उन मामलों पर नजर बनाए हुए हैं जहां कागजों में हेरफेर कर संपत्तियों का लेन-देन किया गया। अदालत के इस नए फैसले के बाद ऐसी सभी पुरानी फाइलों पर कानूनी जांच और तेज होने के आसार हैं।


