
Jharkhand High Court: झारखंड लॉ ऑफिसर एंगेजमेंट नियमावली 2026 और इसके तहत नए वकीलों के चयन के लिए निकाले गए आवेदन को चुनौती देने वाले मामले में झारखंड हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई। सोमवार को हुई विस्तृत बहस के बाद अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें पूरी तरह सुनकर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। चीफ जस्टिस और जस्टिस मनोज प्रसाद की खंडपीठ में इस पूरे मामले पर लंबी कानूनी बहस हुई, जिसके बाद अब कोर्ट के अंतिम आदेश का इंतजार किया जा रहा है।

नई चयन प्रक्रिया और नियमों को चुनौती
यह याचिका झारखंड हाईकोर्ट के अधिवक्ता लाल ज्ञान रंजन नाथ शाहदेव की ओर से दाखिल की गई है। अदालत में उनकी तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता ऋतू कुमार ने पक्ष रखा। याचिका में राज्य सरकार द्वारा तैयार की गई नई नियमावली 2026 की वैधानिकता पर सवाल उठाए गए हैं और इसे मनमाना बताते हुए कई कानूनी आधारों पर रद्द करने की मांग की गई है।

एसोसिएट काउंसिल हटाने के फैसले पर सवाल
\याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि पिछली व्यवस्था के तहत पूरी निष्ठा से काम कर रहे एसोसिएट काउंसिल को बिना किसी ठोस वजह या पर्याप्त आधार के अचानक हटाया जा रहा है। उनका कहना है कि नई नियमावली लाकर पुराने वकीलों को दरकिनार करना नियमों के अनुकूल नहीं है। अदालत ने इस बिंदु पर राज्य सरकार और याचिकाकर्ता दोनों पक्षों के तर्कों को बारीकी से परखा और रिकॉर्ड पर लेने के बाद फैसले को सुरक्षित रख लिया।


