
JSSC CGL Paper Leak: झारखंड की प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी करने वाले नेटवर्क पर कानूनी शिकंजा और मजबूत हो गया है। जेएसएससी सीजीएल परीक्षा और 14वीं जेपीएससी फर्जीवाड़ा मामले के मुख्य आरोपी अभय तिवारी और उसके सहयोगी समीर कुमार को अदालत से बड़ा झटका लगा है। अपर न्याययुक्त योगेश कुमार की अदालत ने दोनों की जमानत याचिका पूरी तरह खारिज कर दी है। अभय तिवारी ने 28 अगस्त को जमानत के लिए अर्जी दाखिल की थी, जिस पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने किसी भी तरह की राहत देने से इनकार कर दिया।

एजेंसी के पद की आड़ में चलाया सिंडिकेट
इस पूरे मामले में सामने आया है कि अभय तिवारी परीक्षा संचालन का काम देख रही टीडीपीएल एजेंसी में मार्केटिंग मैनेजर के पद पर तैनात था। इसके साथ ही वह खाद्य आपूर्ति विभाग में भी कार्यरत था और खुद कई प्रतियोगी परीक्षाएं निकाल चुका था। परीक्षा संचालन से जुड़े अहम पद पर होने का फायदा उठाकर उसने पेपर लीक और फर्जीवाड़े का एक बड़ा नेटवर्क खड़ा कर लिया। इस सिंडिकेट में उसकी पत्नी सुषमा कुमारी और भाई अक्षय तिवारी भी शामिल रहे हैं, जो पहले से ही न्यायिक हिरासत में जेल में बंद हैं।

CID की जांच में 37 गिरफ्तारियां
मामले की जांच कर रही CID की टीम इस पूरे रैकेट की वित्तीय कड़ियों और अवैध लेन-देन की गहराई से पड़ताल कर रही है। जांच एजेंसी अब तक सफल अभ्यर्थियों, कोचिंग सेंटरों के संचालकों और परीक्षा एजेंसी से जुड़े कर्मचारियों समेत कुल 37 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। पूछताछ के दौरान जांच टीम को कई अहम सुराग और तकनीकी साक्ष्य मिले हैं, जिसके आधार पर आने वाले दिनों में कुछ और बड़े चेहरों पर कार्रवाई तय मानी जा रही है।


