
बिहार के खगड़िया जिले में बाढ़ प्रभावित लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए जिला प्रशासन ने अनूठी पहल की है। परबत्ता प्रखंड के अगुवानी गंगा घाट से बिहार का पहला Floating Clinic शुरू किया गया है। यह क्लिनिक जरूरत के मुताबिक बाढ़ प्रभावित इलाकों तक पहुंचकर मरीजों का इलाज कर रहा है।

बाढ़ के कारण जब सड़क मार्ग से अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है, तब यह फ्लोटिंग क्लिनिक लोगों के लिए बड़ी राहत बन रहा है। क्लिनिक में सामान्य इलाज के साथ गर्भवती महिलाओं के प्रसव की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।

Floating Clinic में 24 घंटे डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी तैनात
फ्लोटिंग क्लिनिक में 24 घंटे डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी तैनात रहते हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुंचकर मरीजों की जांच और उपचार किया जाता है। गर्भवती महिलाओं को भी जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
सिविल सर्जन डॉ. रमेंद्र कुमार के अनुसार, अब तक फ्लोटिंग क्लिनिक के जरिए करीब 1,300 मरीजों का इलाज किया जा चुका है। कई गर्भवती महिलाओं का सुरक्षित प्रसव भी कराया गया है। उन्होंने बताया कि बाढ़ के दौरान लोगों को समय पर स्वास्थ्य सुविधा मिल सके, इसी उद्देश्य से फ्लोटिंग क्लिनिक की शुरुआत की गई है।
8 बोट एंबुलेंस भी राहत में जुटी
बाढ़ प्रभावित लोगों को अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचाने के लिए जिला प्रशासन ने 8 बोट एंबुलेंस भी तैनात की हैं। ये एंबुलेंस बाढ़ के पानी से घिरे गांवों तक पहुंच रही हैं।
आपात स्थिति में मरीजों को नाव के जरिए सुरक्षित तरीके से स्वास्थ्य केंद्रों तक ले जाया जा रहा है। इससे उन इलाकों के लोगों को विशेष राहत मिल रही है, जहां बाढ़ के कारण सड़क संपर्क प्रभावित है।
70 से ज्यादा गांव अब भी पानी से घिरे
खगड़िया के परबत्ता, मानसी, गोगरी और सदर प्रखंड में डेढ़ लाख से अधिक आबादी बाढ़ से प्रभावित बताई जा रही है। जलस्तर में कमी आने लगी है, लेकिन कई इलाकों में हालात अभी सामान्य नहीं हुए हैं।
जिले के 70 से अधिक गांव अभी भी बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं। ऐसे में फ्लोटिंग क्लिनिक और बोट एंबुलेंस के जरिए प्रशासन प्रभावित आबादी तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में जुटा है। बाढ़ के बीच नाव पर इलाज की यह व्यवस्था उन लोगों के लिए अहम साबित हो रही है, जिनके लिए अस्पताल तक पहुंचना आसान नहीं है।


