
Ranchi: झारखंड पुलिस के हवलदारों की सीनियरिटी को लेकर लंबे समय से चली आ रही प्रक्रिया में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। झारखंड हाईकोर्ट के आदेश के बाद झारखंड सशस्त्र पुलिस (JAP) संवर्ग के हवलदारों की औपबंधिक राज्य वरीयता सूची जारी कर दी गई है। इस सूची में कुल 1,859 हवलदारों को शामिल किया गया है।

डीआईजी, झारखंड सशस्त्र पुलिस की ओर से जारी आदेश में संबंधित इकाइयों को सूची का मिलान करने और किसी तरह की गड़बड़ी सामने आने पर इसकी जानकारी मुख्यालय को देने को कहा गया है।

हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में बनी सूची
पुलिस मुख्यालय के आदेश के मुताबिक यह औपबंधिक वरीयता सूची झारखंड हाईकोर्ट में WP(S) No.-3331/2023 और Cont. (Civil) No.-775/2025 में पारित आदेश के अनुपालन में तैयार की गई है।
इस संबंध में गृह विभाग और पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी निर्देशों को भी आधार बनाया गया है।
आउट ऑफ टर्न प्रमोशन वालों की सीनियरिटी कैसे होगी तय?
आदेश में आउट ऑफ टर्न प्रोन्नति पाने वाले पुलिसकर्मियों और पदाधिकारियों की वरीयता को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की गई है।
ऐसे पुलिसकर्मियों की सीनियरिटी आउट ऑफ टर्न प्रोन्नति के बाद संबंधित पद पर योगदान यानी पद ग्रहण करने की तारीख के आधार पर निर्धारित की जाएगी।
यह प्रावधान ऐसे जवानों के लिए काफी महत्वपूर्ण हो सकता है, जिनकी वरीयता आउट ऑफ टर्न प्रमोशन की वजह से प्रभावित होती रही है।
नाम छूटा है तो कर सकेंगे दावा
औपबंधिक सूची जारी होने का मतलब है कि अभी इसमें सामने आने वाली त्रुटियों और आपत्तियों पर विचार किया जा सकता है।
आदेश में कहा गया है कि यदि किसी योग्य हवलदार का नाम वरीयता सूची में शामिल होने से छूट गया है तो उससे अभ्यावेदन प्राप्त किया जाए। संबंधित साक्ष्यों की जांच करने के बाद स्पष्ट मंतव्य के साथ मामला अविलंब मुख्यालय भेजने को कहा गया है।
रिटायरमेंट या मृत्यु की जानकारी भी देनी होगी
सूची में शामिल किसी हवलदार की सेवानिवृत्ति या मृत्यु हो चुकी है अथवा उसने सेवा छोड़ दी है तो इसकी सूचना भी मुख्यालय को देनी होगी।
इसके अलावा नाम, सेवा संबंधी विवरण या किसी अन्य तरह की त्रुटि मिलने पर उसे भी तत्काल मुख्यालय के संज्ञान में लाने का निर्देश दिया गया है।
1,859 हवलदारों के लिए क्यों अहम है यह सूची?
राज्यस्तरीय वरीयता सूची पुलिसकर्मियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि सीनियरिटी का सीधा संबंध आगे की सेवा और प्रोन्नति संबंधी मामलों से हो सकता है।
फिलहाल जारी सूची औपबंधिक है। ऐसे में सूची में नाम या सेवा विवरण से जुड़ी गड़बड़ी मिलने पर संबंधित हवलदार के पास निर्धारित प्रक्रिया के तहत अभ्यावेदन देने का रास्ता मौजूद है।


