
Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट में JSSC CGL और अन्य भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ दायर कई याचिकाओं पर जोरदार सुनवाई हुई। अदालत के सामने प्रार्थी, हस्तक्षेपकर्ता और राज्य सरकार तीनों पक्षों की ओर से लंबी बहस चली। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने मामले से जुड़ी एक सीलबंद जांच रिपोर्ट अदालत में दाखिल की, जिसके बाद अदालत ने आगे की कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित कर दी। हाईकोर्ट इस वक्त आकाश गौरव, निरोज खेस समेत कई अभ्यर्थियों की याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई कर रहा है।

भारी पैमाने पर वित्तीय लेन-देन, पूरी परीक्षा रद्द करना ही सही कदम
राज्य सरकार की तरफ से पेश हुईं सीनियर एडवोकेट मीनाक्षी अरोड़ा और महाधिवक्ता रोहिताश्य राय ने JSSC CGL परीक्षा को रद्द करने के फैसले को पूरी तरह सही ठहराया। सरकार का कहना था कि जांच में बड़े पैमाने पर धांधली और फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन के ठोस सबूत सामने आए हैं। मामले में अब तक 28 से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और यह संख्या लगातार बढ़ रही है। सरकारी वकीलों ने साफ किया कि अभी जांच जारी है और गड़बड़ी इतनी फैली हुई है कि दोषी और निर्दोष अभ्यर्थियों के बीच फर्क करना नामुमकिन है, इसलिए पूरी परीक्षा को रद्द करना जरूरी था।

पेपर लीक नहीं हुआ, यह सिर्फ गेस क्वेश्चन का मामला था
दूसरी ओर याचिकाकर्ताओं की तरफ से सीनियर एडवोकेट राजीव रंजन, गोपाल शंकर नारायण, इंद्रजीत सिन्हा, अमृतांश वत्स और श्रेय मिश्रा ने सरकार के फैसले का कड़ा विरोध किया। वकीलों ने दलील दी कि किसी भी परीक्षा केंद्र से प्रश्नपत्र लीक होने का कोई पुख्ता प्रमाण नहीं मिला है। यह मामला सिर्फ संभावित यानी गेस सवालों को रटाने का था, जिसमें नेपाल ले जाकर 28 अभ्यर्थियों को तैयारी कराई गई थी। इनमें से केवल 10 सफल हुए थे और उनके परिणाम रोकने का आदेश पहले ही कोर्ट दे चुका था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने भी सही माना था।
आंदोलनकारी छात्रों के दबाव में फैसला लेने का आरोप
याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने कहा कि SIT दो साल से ज्यादा समय से जांच कर रही है और अब तक कोई अंतिम चार्जशीट दायर नहीं हुई है। जब यह तय ही नहीं है कि कौन दोषी है और कौन नहीं, तो अचानक पूरी परीक्षा रद्द करना कोर्ट के पुराने आदेशों की अवहेलना है। वकीलों ने आरोप लगाया कि सरकार ने सिर्फ आंदोलन कर रहे छात्रों के दबाव में आकर और उन्हें शांत करने के लिए यह फैसला लिया है, जो लाखों ईमानदार अभ्यर्थियों के साथ सरासर नाइंसाफी है।
22 परीक्षाएं रद्द और 17 की जांच जारी
गौरतलब है कि CID जांच में मिले सुरागों के आधार पर राज्य सरकार ने 18 अगस्त की देर रात उन सभी परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा की थी, जिनमें TDPL एजेंसी शामिल थी। इसके साथ ही कार्मिक प्रशासनिक विभाग ने एक अधिसूचना जारी कर 22 परीक्षाओं को रद्द, 6 की प्रक्रिया को स्थगित और 17 पुरानी परीक्षाओं को जांच के दायरे में शामिल किया है। हाईकोर्ट का अंतिम रुख क्या रहता है, इसी पर लाखों उम्मीदवारों का भविष्य टिका हुआ है।


