
JSSC-CGL Paper Leak: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग यानी JSSC की CGL 2023 परीक्षा पेपर लीक कांड में CID ने अदालत में अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट पेश कर दी है। धनबाद के रहने वाले मुख्य आरोपी दीपक कुमार की जमानत याचिका का कड़ा विरोध करते हुए CID ने कई चौंकाने वाले राज खोले हैं। एजेंसी ने कोर्ट को बताया कि दीपक ने लाखों रुपये की घूस देकर सहायक प्रशाखा पदाधिकारी के पद पर अपना चयन पक्का कराया था। इतना ही नहीं, उसने अपने प्रभाव और पैसे के दम पर अपने साले उमेश कुमार राय समेत कई अन्य चहेतों को भी पूरी सेटिंग के जरिए परीक्षा पास कराई थी। इन पुख्ता सबूतों के आधार पर CID ने दीपक, उसके साले उमेश, आनंद कुमार सिंह और विजय कुमार तिवारी को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

19 लाख के लेन-देन और बैंक खातों का ब्योरा आया सामने
CID की पड़ताल में पैसों के भारी-भरकम खेल का पर्दाफाश हुआ है। जांच में पाया गया कि इस पूरी सांठगांठ के लिए 19 लाख रुपये का सीधा लेन-देन हुआ था। 22 जनवरी 2026 को दीपक के ससुर सुरेश राय के बैंक खाते में 14 लाख रुपये और उसके साले उमेश के अकाउंट में 5 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए थे। डिजिटल रिकॉर्ड और बैंक स्टेटमेंट से यह भी साफ हुआ है कि आरोपी लगातार परीक्षा में बैठने वाले कई अन्य कैंडिडेट्स के सीधे संपर्क में था और उनसे मोटी रकम वसूली जा रही थी।

बोकारो की BCCL कॉलोनी को बनाया गया था मुख्य अड्डा
जांच रिपोर्ट के मुताबिक आरोपी उमेश कुमार राय मूल रूप से बिहार के भोजपुर जिले का रहने वाला है, लेकिन वह बोकारो के दुग्धा स्थित बीसीसीएल कॉलोनी में रह रहा था। इसी रिहायशी ठिकाने को पेपर लीक करने और अभ्यर्थियों को सवाल रटाने का मुख्य सेफ हाउस बनाया गया था। CID ने यह भी बेनकाब किया है कि परीक्षा कराने का जिम्मा संभालने वाली एजेंसी ICN के संचालक मिथिलेश सिंह ने अपने कर्मचारियों और करीबी रिश्तेदारों के नेटवर्क के जरिए प्रश्नपत्र लीक कराया था। केस डायरी में कोचिंग संचालक राजेश प्रसाद के बयान भी दर्ज हैं, जिन्होंने बताया था कि धनबाद के बलियापुर सेंटर पर परीक्षा शुरू होने से पहले ही पर्चा मोबाइल पर वायरल हो चुका था।
अदालत का सख्त रुख, जमानत याचिका सिरे से खारिज
मामले की गंभीरता और CID द्वारा पेश किए गए ठोस सुबूतों को देखते हुए रांची की अपर न्यायायुक्त योगेश कुमार की अदालत ने आरोपी दीपक कुमार की जमानत अर्जी को खारिज कर दिया। अदालत ने माना कि प्रतियोगी परीक्षाओं में इस तरह की धांधली लाखों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। 29 अगस्त 2026 से जेल में बंद दीपक को फिलहाल सलाखों के पीछे ही रहना होगा, जबकि सीआईडी इस सिंडिकेट से जुड़े अन्य चेहरों की तलाश में जुटी हुई है।


