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मिथिला की बेटी भावना कंठ ने रचा इतिहास, पहली महिला जिसने किया ये कोर्स पूरा

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दरभंगा: मिथिला की बेटी और घनश्यामपुर प्रखंड के बाउर गांव निवासी स्क्वाड्रन लीडर भावना कंठ ने भारतीय वायुसेना में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने ग्वालियर स्थित टैक्टिक्स एंड एयर कॉम्बैट डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट में प्रतिष्ठित फाइटर कॉम्बैट लीडर (FCL) कोर्सपूरा कर इतिहास रच दिया है। भावना यह कोर्स पूरा करने वाली देश की पहली महिला फाइटर पायलट बन गई हैं। उनकी इस उपलब्धि से बिहार, दरभंगा-मिथिला और खासकर बाउर गांव में खुशी का माहौल है।

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20 सप्ताह के कठिन प्रशिक्षण के बाद हासिल की उपलब्धि

करीब 20 सप्ताह का FCL कोर्स भारतीय वायुसेना के चुनौतीपूर्ण युद्धक प्रशिक्षण कार्यक्रमों में शामिल है। इसमें पायलटों को जटिल हवाई युद्ध अभियानों, उन्नत युद्धक रणनीति और नेतृत्व क्षमता का प्रशिक्षण दिया जाता है।

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कोर्स पूरा करने के बाद भावना युद्ध जैसी परिस्थितियों में हवाई अभियानों का नेतृत्व करने में सक्षम होंगी। कठिन युद्धक प्रशिक्षण में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले फाइटर पायलटों को इस कोर्स के बाद ‘टॉप गन’ के तौर पर भी पहचान मिलती है। भावना फिलहाल पंजाब में पदस्थापित हैं।

2015 में फाइटर स्ट्रीम में शामिल हुईं

भावना कंठ का जन्म 1 दिसंबर 1992 को बेगूसराय के बरौनी में हुआ। उनके पिता तेज नारायण कंठ इंजीनियर और मां राधा कंठ गृहिणी हैं। उन्होंने शुरुआती पढ़ाई डीएवी पब्लिक स्कूल, बरौनी से की और इसके बाद बेंगलुरु के BMS कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की।

वर्ष 2015 में भारतीय वायुसेना में महिलाओं को फाइटर स्ट्रीम में शामिल किए जाने का रास्ता खुला। भावना भी इस अवसर का हिस्सा बनीं। प्रशिक्षण के बाद वर्ष 2016 में तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रीकर ने उन्हें कमीशन प्रदान किया। इसके बाद वह भारतीय वायुसेना के फाइटर स्क्वाड्रन का हिस्सा बनीं।

पहली महिला फाइटर पायलटों के बैच का हिस्सा

वर्ष 2016 में भावना कंठ देश की पहली महिला फाइटर पायलटों के बैच में शामिल हुईं। इसके बाद वर्ष 2019 में वह लड़ाकू विमान से कॉम्बैट मिशन के लिए योग्य होने वाली पहली भारतीय महिला फाइटर पायलट बनीं। वर्ष 2021 में गणतंत्र दिवस परेड में फाइटर पायलट के रूप में शामिल होकर भी उन्होंने एक और उपलब्धि अपने नाम की।

बचपन से था आसमान में उड़ने का सपना

भावना के पिता तेज नारायण कंठ के अनुसार, उनकी बेटी बचपन से ही चिड़ियों की तरह आसमान में उड़ने का सपना देखती थीं। वह NDA में जाना चाहती थीं, लेकिन यह सपना पूरा नहीं हो सका। इसके बाद उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की, लेकिन सैन्य सेवा में जाने का सपना नहीं छोड़ा।

भावना के छोटे भाई नीलांबर कंठ और छोटी बहन तनुजा कंठ भी इंजीनियर हैं। भावना की नई उपलब्धि न सिर्फ उनके परिवार और मिथिला के लिए गर्व का विषय है, बल्कि देश की बेटियों के लिए भी प्रेरणा मानी जा रही है।

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