
Palamu: पलामू जिले के हुसैनाबाद अनुमंडल मैदान में पिछले छह दिनों से संचालित काली कंबली वाले बाबा के कथित उपचार शिविर को लेकर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। किसान ब्रिगेड के एक प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को पलामू उपायुक्त दिलीप प्रताप सिंह शेखावत से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर शिविर की विस्तृत जांच कराने और किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।

चमत्कारी इलाज और दवा बिक्री की निष्पक्ष जांच की मांग
किसान ब्रिगेड ने सौंपे गए ज्ञापन में आरोप लगाया है कि शिविर में लकवा, पोलियो, मूक-बधिरता और मधुमेह जैसी गंभीर असाध्य बीमारियों को ठीक करने का दावा कर ग्रामीण इलाकों के सीधे-साधे लोगों को आकर्षित किया जा रहा है। किसान ब्रिगेड के संरक्षक कर्नल (सेवानिवृत्त) संजय सिंह ने कहा कि निःशुल्क मेडिकल शिविर के नाम पर लोगों की भारी भीड़ जुटाई जा रही है, जबकि अंदर दवाओं की बिक्री किए जाने की लगातार शिकायतें मिल रही हैं। उन्होंने शिविर में बांटी और बेची जा रही दवाओं की स्वीकृति, गुणवत्ता, परीक्षण, बिक्री की अनुमति और निर्धारित मूल्य के साथ-साथ दवा बिक्री से संबंधित जीएसटी और आयकर नियमों की भी गहन जांच कराने की मांग की है।

अंधविश्वास और दावों की वैज्ञानिक जांच का आग्रह
कर्नल संजय सिंह ने स्पष्ट रूप से कहा कि अंधविश्वास और झाड़-फूंक के माध्यम से गंभीर बीमारियों के पूर्ण रूप से ठीक होने के दावों की वैज्ञानिक जांच होनी चाहिए। इसके अलावा प्रतिनिधिमंडल ने मैदान के निःशुल्क आवंटन की शर्तों का पालन हो रहा है या नहीं, इसकी समीक्षा करने का आग्रह किया है। यदि जांच में किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी या अपराध की पुष्टि होती है, तो संबंधित आयोजकों के खिलाफ विधिसम्मत मामला दर्ज करने की मांग की गई है।
बुनियादी सुविधाओं की कमी और सुरक्षा पर चिंता व्यक्त की
प्रतिनिधिमंडल ने शिविर में पहुंचे मरीजों और उनके परिजनों के लिए पीने के पानी, शौचालय, ठहरने और सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने का गंभीर आरोप लगाया। किसान ब्रिगेड ने शिविर में लगातार बढ़ रही पॉकेटमारी और चोरी की घटनाओं का हवाला देते हुए प्रशासन से वहां पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है। प्रतिनिधिमंडल ने स्वास्थ्य विभाग की विशेष टीम भेजकर पूरे मामले की त्वरित जांच कराने का आग्रह किया है। इस प्रतिनिधिमंडल में भोला पासवान, सुधीर सिंह, मनोहर सिंह और सुभाष कुमार मुख्य रूप से शामिल थे।


