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21 अक्टूबर से ठप हो सकती हैं एम्बुलेंस सेवाएं, मांगों को लेकर कर्मचारियों का आंदोलन तेज

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Jharkhand News: झारखंड प्रदेश एम्बुलेंस कर्मचारी संघ के आह्वान पर राज्यभर के 108 आपातकालीन एम्बुलेंस कर्मचारियों का चरणबद्ध आंदोलन बुधवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। अपनी लंबित मांगों के समर्थन में कर्मचारियों ने ड्यूटी के दौरान काला बिल्ला लगाकर काम किया और शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज कराया। कर्मचारियों का कहना है कि वे मरीजों की सेवा प्रभावित किए बिना सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाना चाहते हैं।

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आंदोलन की आगे की रूपरेखा तय

संघ के प्रदेश महामंत्री सूरज साहू ने बताया कि पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। आगामी 9 अक्टूबर को राज्यभर में कैंडल मार्च निकाला जाएगा और उसके बाद 12 अक्टूबर को सांकेतिक रूप से भिक्षाटन किया जाएगा। इसी कड़ी में 14 अक्टूबर को धरना-प्रदर्शन का आयोजन होगा और 16 अक्टूबर को पूर्ण हड़ताल के साथ महाधरना दिया जाएगा। यदि इसके बाद भी मांगों पर कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो 21 अक्टूबर से सभी एम्बुलेंस कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।

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आश्वासन के बाद भी कार्रवाई न होने से आक्रोश

सूरज साहू ने बताया कि बीते 16 सितंबर को राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई थी। उस बैठक में कर्मचारियों की समस्याओं और मांगों का 15 से 20 दिनों के भीतर समाधान करने का ठोस आश्वासन दिया गया था। हालांकि, तय समय-सीमा बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जिससे कर्मचारियों में गहरा असंतोष और आक्रोश व्याप्त है।

आपातकालीन सेवा के बावजूद अनदेखी का आरोप

संघ ने कहा कि 108 एम्बुलेंस कर्मचारी दिन-रात गंभीर मरीजों, गर्भवती महिलाओं और सड़क दुर्घटना पीड़ितों तक त्वरित आपातकालीन चिकित्सा सेवा पहुंचाते हैं। इसके बावजूद उन्हें समय पर वेतन, रोजगार सुरक्षा और मूलभूत वैधानिक अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है, जो बेहद निराशाजनक है।

कर्मचारियों की मुख्य मांगें

कर्मचारियों की मुख्य मांगों में 108 एम्बुलेंस सेवा का संचालन सीधे सरकारी स्तर पर किया जाना शामिल है। इसके साथ ही कर्मचारियों का वेतन भुगतान सिविल सर्जन के माध्यम से करने और सम्मान फाउंडेशन द्वारा हटाए गए सभी कर्मचारियों की सेवा में पुनर्बहाली की मांग की गई है। इसके अलावा ईपीएफ, ईएसआई, ओवरटाइम, ग्रेच्युटी और सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन सुनिश्चित करने की मांग उठाई गई है।

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