
Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य की जेलों में खाली पड़े पदों को भरने में हो रही देरी को लेकर बेहद सख्त रवैया अपनाया है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली बेंच ने अदालती आदेश का अनुपालन न होने पर गहरी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने आदेश का पालन न करने के कारण झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) के सचिव और राज्य के गृह सचिव को कारण बताओ (शोकॉज़) नोटिस जारी कर दिया है।

6 हफ्ते का समय देने से इनकार, 1 सप्ताह में मांगा जवाब
कोर्ट ने दोनों बड़े अधिकारियों से 1 सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है और पूछा है कि आदेश की अनदेखी के लिए उनके खिलाफ अवमानना (कंटेंप्ट) की कार्रवाई क्यों न की जाए। सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से प्रक्रिया पूरी करने के लिए 6 हफ्ते का अतिरिक्त समय मांगा गया था, लेकिन कोर्ट ने समय देने वाली याचिका को खारिज कर दिया। आयोग की तरफ से समय बढ़ाने की मांग को भी हाईकोर्ट ने साफ खारिज कर दिया।

फिजिकल टेस्ट लिस्ट न मिलने से अटका काम
मामले की सुनवाई के दौरान जेएसएससी के वकील ने कोर्ट को बताया कि असिस्टेंट जेलर और जेल वार्डन पदों की भर्ती प्रक्रिया में आयोग तभी आगे बढ़ पाएगा, जब सरकार सफल अभ्यर्थियों के फिजिकल टेस्ट की लिस्ट सौंपेगी। अभी तक गृह विभाग की ओर से अभ्यर्थियों की फिजिकल टेस्ट लिस्ट उपलब्ध नहीं कराई गई है, जिससे पूरी चयन प्रक्रिया ठप पड़ी है।
81 फीसदी पद खाली, 6 महीने में भर्ती का था आदेश
हाईकोर्ट ने पूर्व की सुनवाई में 1 अप्रैल को ही राज्य सरकार और जेएसएससी को सख्त हिदायत दी थी कि 6 महीने के भीतर जेलों में सभी खाली पदों को भरा जाए। कोर्ट को सूचित किया गया था कि राज्य की जेलों में 81 प्रतिशत से अधिक पद खाली हैं। गुरुवार को हुई सुनवाई में सरकार ने बताया कि मॉडल जेल मैनुअल और व्यवस्था सुधार के तहत असिस्टेंट जेलर, जेल वार्डर और मेडिकल स्टाफ के पदों पर बहाली के लिए विज्ञापन जारी किए जा चुके हैं।
अगली सुनवाई की तारीख तय
हाईकोर्ट ने दोनों सचिवों को शोकॉज़ नोटिस का जवाब दाखिल करने का कड़ा निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 26 अक्टूबर तय की है। इसके साथ ही, पूरे आदेश का सही तरीके से अनुपालन हुआ या नहीं, इसकी अंतिम समीक्षा के लिए 15 दिसंबर की तारीख निर्धारित की गई है।


