
Dhanbad: झारखंड की राजनीति में जनआंदोलनों और अपनी अलग सियासी शैली से खास पहचान बनाने वाले डुमरी विधायक जयराम महतो ने अब अकादमिक जगत में भी एक बड़ी उपलब्धि अपने नाम दर्ज करा ली है। उच्च शिक्षा के सर्वोच्च मुकाम पर पहुंचते हुए उन्होंने पीएचडी (Ph.D.) की पढ़ाई सफलतापूर्वक पूरी कर ली है और अब आधिकारिक तौर पर उनके नाम के आगे ‘डॉक्टर’ का तमगा जुड़ गया है। शुक्रवार, 9 अक्टूबर को बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय (BBMKU), धनबाद के भव्य दीक्षांत समारोह में झारखंड के राज्यपाल सह विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार ने उन्हें डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की। इस उपलब्धि के साथ ही वे राज्य के उन गिने-चुने युवा जनप्रतिनिधियों की कतार में शामिल हो गए हैं, जिन्होंने सक्रिय राजनीति के साथ उच्च शिक्षा की साधना को भी मुकाम तक पहुंचाया है।

राज्यपाल के हाथों मिली डिग्री, दीक्षांत समारोह में छाई रही उपलब्धि
धनबाद स्थित बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित दीक्षांत समारोह में राज्यभर के शोधार्थियों और मेधावी छात्रों को डिग्रियां प्रदान की गईं। इसी गरिमामय मंच पर जब डुमरी विधायक जयराम महतो का नाम डॉक्टरेट की उपाधि के लिए पुकारा गया, तो पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने मंच से उन्हें पीएचडी की डिग्री और प्रमाण पत्र सौंपा। डिग्री प्राप्त करने के बाद जयराम महतो ने इसे अपने लंबे शैक्षणिक संघर्ष और गुरुजनों के मार्गदर्शन का परिणाम बताया। उनकी इस सफलता की खबर सामने आते ही डुमरी से लेकर धनबाद और पूरे राज्य में उनके समर्थकों व शुभचिंतकों में खुशी की लहर दौड़ गई।


अंग्रेजी विभाग से किया शोध, हाल ही में पूरा हुआ था अंतिम वाइवा
जयराम महतो ने BBMKU के स्नातकोत्तर अंग्रेजी विभाग से अपना शोध कार्य (रिसर्च) पूरा किया है। विश्वविद्यालय सूत्रों के अनुसार, उन्होंने हाल ही में अपनी पीएचडी थीसिस का फाइनल वाइवा-वॉयस (मौखिकी परीक्षा) सफलतापूर्वक दिया था। बाह्य परीक्षकों और शोध समिति की स्वीकृति के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने औपचारिकताएं पूरी करते हुए उन्हें उपाधि के लिए योग्य घोषित किया था। अंग्रेजी साहित्य और भाषा के क्षेत्र में किया गया उनका यह शोध कार्य उनके गंभीर अकादमिक रुझान को दर्शाता है।
सक्रिय राजनीति और सामाजिक दायित्वों के बीच अकादमिक तपस्या
सार्वजनिक जीवन की आपाधापी, जनमुद्दों को लेकर लगातार आंदोलन और डुमरी विधानसभा क्षेत्र के विधायक के रूप में व्यस्त दिनचर्या के बीच अपनी रिसर्च को पूरा करना अपने आप में एक मिसाल माना जा रहा है। आमतौर पर देखा जाता है कि चुनावी राजनीति में उतरने के बाद लोग अकादमिक जीवन से पूरी तरह कट जाते हैं, लेकिन जयराम महतो ने अपने शोध कार्य को कभी रुकने नहीं दिया। उनकी यह सफलता राज्य के युवाओं और छात्र राजनीति से जुड़े कार्यकर्ताओं को यह कड़ा संदेश देती है कि सामाजिक-राजनीतिक जिम्मेदारियों के निर्वहन के साथ-साथ शिक्षा और शोध के प्रति भी निष्ठा बरकरार रखी जा सकती है।
विधायक के साथ अब ‘डॉक्टरेट’ जननेता के रूप में बनी पहचान
पीएचडी की औपचारिक डिग्री हासिल करने के बाद जयराम महतो के जीवन में एक नया और गौरवशाली अध्याय जुड़ गया है। अब वे सदन से लेकर जनमंचों तक केवल एक मुखर विधायक के रूप में ही नहीं, बल्कि ‘डॉ. जयराम महतो’ के रूप में एक शिक्षित और बौद्धिक जनप्रतिनिधि की पहचान के साथ नजर आएंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उच्च शिक्षा की यह डिग्री उनके राजनीतिक कद को और संवारने के साथ-साथ युवाओं के बीच उनकी विश्वसनीयता को और मजबूत करेगी।


