
Jharkhand: झारखंड में JSSC CGL परीक्षा के तहत चयनित अभ्यर्थियों और वर्तमान में विभिन्न विभागों में कार्यरत कर्मियों ने खुद पर लग रहे गंभीर आरोपों पर पहली बार खुलकर अपना पक्ष रखा है। अभ्यर्थियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर स्पष्ट किया कि उन्होंने सालों के कड़े संघर्ष, दिन-रात की मेहनत और पूरी प्रतियोगी प्रक्रिया से गुजरकर यह नौकरी हासिल की है। उन पर 35 लाख रुपये देकर नौकरी खरीदने का झूठा आरोप लगाया जा रहा है, जिससे न केवल उनका मानसिक उत्पीड़न हो रहा है बल्कि समाज में उनकी छवि भी धूमिल की जा रही है।

CID जांच के लिए तैयार, लेकिन भीड़ के दबाव में न हो कार्रवाई
अभ्यर्थियों ने साफ कहा कि वे किसी भी निष्पक्ष जांच का सामना करने से पीछे नहीं हटेंगे। वे CID या किसी भी अन्य सक्षम एजेंसी से मामले की पड़ताल कराने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। हालांकि, उनकी मुख्य मांग यह है कि जांच किसी पूर्वाग्रह, राजनीतिक दुर्भावना या सड़क पर हो रहे विरोध-प्रदर्शन के दबाव में नहीं होनी चाहिए।

अभ्यर्थियों ने पूरी चयन प्रक्रिया का ब्योरा देते हुए बताया कि भर्ती की शुरुआत 2016 में हुई थी, जिसमें लगभग तीन लाख उम्मीदवारों ने हिस्सा लिया। इसके बाद करीब 26 हजार अभ्यर्थी सफल हुए और अंततः लगभग दो हजार पदों पर अंतिम चयन हुआ। उन्होंने कहा कि यह सफलता किसी शॉर्टकट का नतीजा नहीं बल्कि एक दशक लंबे संघर्ष का परिणाम है।
600 आदिवासी और 96 फीसदी स्थानीय मूलवासी चयनित
पेयजल एवं स्वच्छता विभाग में ASO के पद पर कार्यरत जयदीप ने जानकारी दी कि चयनित अभ्यर्थियों में 600 से अधिक आदिवासी छात्र-छात्राएं शामिल हैं और कुल चयनितों में लगभग 96 फीसदी झारखंड के स्थानीय मूलवासी हैं। कई अभ्यर्थी पहले से अन्य सरकारी विभागों में सेवाएं दे रहे थे और बेहतर भविष्य के लिए इस परीक्षा में बैठे थे। अभ्यर्थियों ने सवाल उठाया कि जब उन्होंने 10 साल कड़ी मेहनत की है, तो उन पर पैसे देकर नौकरी पाने का बेबुनियाद ठप्पा लगाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
वहीं ASO अनिल रजक ने कहा कि समाज में अब उन्हें संदेह की दृष्टि से देखा जाने लगा है, जिससे उनका पूरा परिवार मानसिक तनाव झेल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि गरीब, पिछड़े और सामान्य परिवारों से ताल्लुक रखने वाले चयनित युवाओं के पक्ष को सामने नहीं लाया जा रहा है।
ITBP से इस्तीफा देकर आए ASO प्रेस कॉन्फ्रेंस में रो पड़े
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कोल्हान क्षेत्र के चाईबासा निवासी और ASO पद पर चयनित चंद्रो हैबुरू अपनी व्यथा सुनाते हुए भावुक होकर रो पड़े। उन्होंने बताया कि वह एक साधारण आदिवासी परिवार से आते हैं और उनके पिता की मौत पेड़ से गिरने से हो गई थी। उन्होंने बेहद तंगहाली में पढ़ाई की और पहले ITBP में नौकरी हासिल की।
चंद्रो हैबुरू ने कहा कि वे ITBP की सुरक्षित नौकरी से इस्तीफा देकर राज्य की सेवा के लिए यहां आए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि उनके जैसा गरीब अभ्यर्थी 35 लाख रुपये कहां से लाएगा। उन्होंने कहा कि आज स्थिति ऐसी बना दी गई है कि ईमानदारी से परीक्षा पास करने के बावजूद उन्हें सार्वजनिक रूप से सफाई देनी पड़ रही है।
कटऑफ पर उठाए सवाल, कोर्ट पर जताया पूरा भरोसा
अभ्यर्थियों ने पेपर लीक के दावों के बीच परीक्षा के कटऑफ का तर्क सामने रखा। उनका कहना था कि यदि बड़े पैमाने पर पेपर लीक हुआ होता, तो कटऑफ 33 प्रतिशत के आसपास नहीं रहता बल्कि बहुत ऊपर जाता। हालांकि उन्होंने माना कि कटऑफ के आधार पर किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता और यह पूरी तरह जांच का विषय है।
अभ्यर्थियों ने सरकार और प्रशासन के समक्ष अपनी मांगें रखते हुए कहा कि जांच पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए। अगर किसी एक व्यक्ति की नियुक्ति में धांधली या गड़बड़ी साबित होती है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, लेकिन कुछ लोगों की कथित गलतियों की सजा पूरी चयन सूची और ईमानदारी से पास हुए सभी अभ्यर्थियों को नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने दोहराया कि मामला अदालत में विचाराधीन है और उनकी ज्वाइनिंग भी अदालती निर्देशों के तहत हुई है, इसलिए उन्हें न्यायिक व्यवस्था पर पूरा विश्वास है।


