
Kolkata: दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल के महीनों में हुए आंदोलनों और चुनाव आयोग पर उठे सवालों के बाद विपक्षी खेमे को सियासी बढ़त मिलने की उम्मीद थी। तत्कालीन शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और SIR प्रक्रिया को लेकर छिड़ी बहस के बाद राष्ट्रीय स्तर पर माहौल गर्माया हुआ था। हालांकि, चुनावी जमीन पर इन विरोधों का सीधा असर वैसा नजर नहीं आया जैसी उम्मीद जताई जा रही थी। पश्चिम बंगाल की रेजीनगर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के नतीजों ने सभी राजनीतिक समीकरणों को उलटकर रख दिया है।

70 फीसदी मुस्लिम आबादी और 75 हजार से ज्यादा मतों की जीत
पश्चिम बंगाल की दो सीटों पर हुए उपचुनाव में नंदीग्राम के नतीजों की पहले से चर्चा थी, लेकिन रेजीनगर के नतीजों ने विश्लेषकों को चौंका दिया है। करीब 70 प्रतिशत मुस्लिम मतदाताओं वाली इस सीट को बीजेपी के लिए राजनीतिक तौर पर सबसे कठिन क्षेत्रों में गिना जाता था। इस उपचुनाव में बीजेपी उम्मीदवार शंखरव सरकार ने 1,29,914 वोट हासिल कर इतिहास रच दिया। उन्होंने हुमायूं कबीर की पार्टी (AJUP) के प्रत्याशी और उनके बेटे गुलाम नबी आजाद को 75,816 वोटों के बड़े अंतर से मात दी। गुलाम नबी आजाद को महज 54,098 वोटों से संतोष करना पड़ा।

कांग्रेस और TMC का बेहद लचर प्रदर्शन
इस मुकाबले में पारंपरिक विपक्षी दलों की हालत बेहद कमजोर नजर आई। कांग्रेस उम्मीदवार 6,168 मतों के साथ तीसरे स्थान पर रहे, जबकि तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रत्याशी को सिर्फ 3,847 वोट मिल सके। अन्य प्रमुख दलों द्वारा मुस्लिम उम्मीदवारों को मैदान में उतारे जाने के बावजूद मतदाताओं का एक बड़ा धड़ा बीजेपी के पक्ष में जाता दिखा। इस अप्रत्याशित चुनावी जीत के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने अल्पसंख्यकों के साथ सीधा संवाद और दोस्ती का रुख अपनाया है।
बदली रणनीति और विकास का नया नैरेटिव
चुनावी प्रचार के दौरान रेजीनगर में बीजेपी ने अपनी पारंपरिक रणनीति से हटकर प्रचार अभियान चलाया था। धार्मिक ध्रुवीकरण के बजाय नेताओं ने स्थानीय मुद्दों और विकास को केंद्र में रखा। पार्टी नेतृत्व की तरफ से संदेश दिया गया कि यह समय पुराने विवादों का नहीं बल्कि जमीनी तरक्की और बुनियादी सुविधाओं पर बात करने का है। 12वें राउंड के बाद से ही बढ़त लगातार मजबूत होती गई और अंततः पार्टी ने इस सीट पर पहली बार ऐतिहासिक अंतर के साथ जीत का परचम लहरा दिया।


