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एक आम पत्रकार बनाम ताकतवर IPS?, अफसरों के चक्कर काट-काटकर थके तो खटखटाया झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा

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Ranchi News: राजधानी रांची के पॉश इलाके अशोक नगर में एक आम रास्ते को लेकर शुरू हुआ विवाद अब सूबे के सबसे बड़े कानूनी अखाड़े यानी झारखंड हाईकोर्ट की दहलीज पर जा पहुंचा है। थाने में आवेदन, CM से गुहार, केंद्रीय गृह मंत्रालय तक शिकायत और राज्य की गृह सचिव के आश्वासन के बाद भी जब घर के बाहर खड़े ईंट-पत्थरों के बोल्डर नहीं हटे, तो पीड़ित पत्रकार सैयद शरीफ इब्राहिम ने अपने ही घर में बंधक बने रहने से तंग आकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा दिया है। हाईकोर्ट में बाकायदा क्रिमिनल रिट याचिका दाखिल कर दी गई है। याचिका में न केवल घर का रास्ता तुरंत खुलवाने और सुरक्षा मुहैया कराने की मांग की गई है, बल्कि एक सीनियर आईपीएस अफसर के कथित रसूख के सामने बेबस स्थानीय सिस्टम को दरकिनार कर पूरे मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराने की गुहार लगाई गई है।

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हाईकोर्ट में क्रिमिनल रिट: सरकार से लेकर DIG तक बने पार्टी

सैयद शारीफ़ इब्राहिम की ओर से दाखिल इस क्रिमिनल रिट याचिका की पैरवी हाईकोर्ट के अधिवक्ता सौरभ दास और फहीम अख्तर कर रहे हैं। याचिका में मामले से जुड़े तमाम रसूखदारों और जिम्मेदार महकमों को कटघरे में खड़ा किया गया है। इसमें झारखंड सरकार, रांची के उपायुक्त (DC), सदर SDM , अरगोड़ा थाना प्रभारी और मौजूदा समय में रेल DIG के पद पर तैनात IPS प्रियदर्शी आलोक को प्रतिवादी (रेस्पोंडेंट) बनाया गया है। याचिका में साफ कहा गया है कि जब सामने खाकी वर्दी का इतना बड़ा ओहदा हो, तो स्थानीय पुलिस और प्रशासन से निष्पक्ष कदम उठाने की उम्मीद टूटने लगती है, इसीलिए अदालत को सीधे दखल देना पड़ रहा है।

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1963 से खुला रास्ता और 6 परिवारों की जिंदगी पर ताला

अदालत में दाखिल दस्तावेजों के मुताबिक, याचिकाकर्ता का परिवार साल 1963 से ही अशोक नगर रोड नंबर-1 की 40 फीट चौड़ी सड़क से होकर अपने घर आता-जाता रहा है। याचिका में साल 1991 में रांची रीजनल डेवलपमेंट अथॉरिटी (RRDA) से पास किए गए नक्शे का भी हवाला दिया गया है, जिसमें 40 फीट मुख्य सड़क से उनके परिसर तक पहुंचने के लिए 12 फीट का रास्ता साफ दर्ज है। यह रास्ता सिर्फ एक पत्रकार का नहीं है, बल्कि इस अहाते के पांच अलग-अलग मकानों में रहने वाले छह परिवारों के आने-जाने का इकलौता जरिया है। याचिका में सीधा आरोप लगाया गया है कि रेल डीआईजी ने अपने प्रभाव के दम पर दशकों पुराने इस रास्ते को गैरकानूनी तरीके से बंद कर दिया है।

29 सितंबर की वो शाम और AK-47 से भूनने की धमकी का आरोप

याचिका में 29 सितंबर 2026 की शाम हुई उस कथित घटना का सिलसिलेवार ब्योरा दिया गया है, जहां से यह विवाद सड़क से उतरकर थाने पहुंचा था। आरोप है कि शाम करीब 6 बजे डीआईजी के इस्तेमाल वाली सरकारी स्कॉर्पियो (JH01CC 2556) को पत्रकार के घर के गेट के ठीक सामने आड़ा खड़ा कर दिया गया, जिससे किसी का भी बाहर निकलना नामुमकिन हो गया। जब परिजनों ने गाड़ी हटाने की विनती की, तो आरोप के मुताबिक DIG अपने हथियारबंद बॉडीगार्ड्स के साथ पहुंचे। याचिका में बेहद संगीन आरोप लगाया गया है कि परिजनों को AK-47 से गोली मारने की धमकी दी गई और कहा गया कि अगर किसी ने गाड़ी को हाथ भी लगाया तो अंजाम बुरा होगा। इसके अलावा झूठे मुकदमों में फंसाकर पूरी जिंदगी बर्बाद करने की धमकी का भी जिक्र है।

SDM की नोटिस को भी ठेंगा! रात के सन्नाटे में गिराए गए बोल्डर

पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू प्रशासनिक आदेशों की अनदेखी का है। पत्रकार की शिकायत पर अंचल अधिकारी की जांच रिपोर्ट आई और एसडीएम सदर की अदालत में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 166 के तहत केस दर्ज हुआ (वाद संख्या M-2842/2026)। SDM कोर्ट से नोटिस जारी होने के बाद भी कथित तौर पर 3 और 4 अक्टूबर 2026 की देर रात अंधेरे का फायदा उठाकर गेट के सामने ईंटों की ऊंची दीवार और बड़े-बड़े पत्थरों के बोल्डर डंप कर दिए गए। याचिकाकर्ता ने इन पत्थरों और बंद रास्ते की तस्वीरें भी अदालत के सामने बतौर सबूत पेश की हैं।

एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड तक नहीं आ सकती, हाईकोर्ट से मांगी 5 बड़ी राहत

याचिका में इस बात पर गहरी चिंता जताई गई है कि रास्ता बंद होने से परिवार सिर्फ कैद ही नहीं हुआ है, बल्कि किसी अनहोनी की स्थिति में एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड या आपातकालीन गाड़ियां तक घर तक नहीं पहुंच सकतीं। याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से मुख्य रूप से ये राहतें मांगी हैं…

1. अशोक नगर रोड नंबर-1 से घर तक जाने वाले रास्ते से तुरंत सारे अवरोध हटाए जाएं और आने-जाने पर कोई रोक न लगाई जाए।

2. 3 और 4 अक्टूबर की रात गेट पर रखे गए ईंट-पत्थरों को फौरन हटवाया जाए और DIG या उनके गार्ड्स को दखल देने से रोका जाए।

3. 29 सितंबर को अरगोड़ा थाने में दी गई शिकायत पर निष्पक्ष जांच हो और AK-47 से धमकी देने के मामले में संज्ञेय अपराध के तहत एफआईआर दर्ज की जाए।

4. SDM कोर्ट में चल रहे केस (धारा 166 BNSS) का जल्द निपटारा हो और तब तक रास्ते पर यथास्थिति बहाल रहे।

5. पीड़ित परिवार के जान-माल, गरिमा और सुकून से जीने के अधिकार की रक्षा के लिए पुलिस सुरक्षा मुहैया कराई जाए।

अब जब मामला राज्य की सबसे बड़ी अदालत में पहुंच चुका है, तो सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि अदालत इस पूरे हाई-प्रोफाइल विवाद पर प्रशासन और संबंधित पुलिस अधिकारी से क्या जवाब तलब करती है।

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