
Sahibganj: साहिबगंज सदर अस्पताल में डॉक्टरों की गैर-हाजिरी और लचर स्वास्थ्य व्यवस्था से नाराज होकर सिविल सर्जन ने अस्पताल के DS के निजी आवास सह अस्पताल पर अचानक छापेमारी कर दी। सिविल सर्जन डॉ. रामदेव पासवान ने मौके पर मिली कथित अनियमितताओं और निजी प्रैक्टिस की वीडियो रिकॉर्डिंग कराकर सीधे स्वास्थ्य विभाग और सरकार को रिपोर्ट भेज दी है। वहीं दूसरी ओर DS डॉ. देवेश कुमार ने इस पूरी छापेमारी को दुर्भावनापूर्ण और गलत बताते हुए सिविल सर्जन के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है।

OPD में सिर्फ एक डॉक्टर, गायब मिले DS
सिविल सर्जन डॉ. रामदेव पासवान के अनुसार वे सुबह 10 से 11 बजे के बीच सदर अस्पताल का औचक निरीक्षण करने पहुंचे थे। निरीक्षण के दौरान OPD में केवल एक डॉक्टर तैनात मिले, जबकि दूर-दराज से आए मरीज इलाज के लिए परेशान हो रहे थे। सिविल सर्जन का कहना है कि वे लगभग एक घंटे तक अस्पताल में मौजूद रहे, लेकिन सदर अस्पताल के DS डॉ. देवेश कुमार ड्यूटी पर नहीं पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि DS की लगातार अनुपस्थिति के कारण ही अस्पताल की व्यवस्था बिगड़ी है और जिला प्रशासन को बार-बार दखल देना पड़ रहा है।

आवास पर चल रहा था निजी अस्पताल और अल्ट्रासाउंड सेंटर
अस्पताल में DS के न मिलने पर सिविल सर्जन सीधे उनके आवास पर पहुंचे। वहां का नजारा देखकर वे हैरान रह गए। सिविल सर्जन का दावा है कि उसी बिल्डिंग में DS का निजी अस्पताल और अल्ट्रासाउंड सेंटर संचालित हो रहा था, जहां बड़ी संख्या में मरीज कतार लगाकर बैठे थे। पूछताछ में स्टाफ ने बताया कि डॉक्टर साहब ऊपर आवास में मौजूद हैं और नीचे क्लिनिक चल रहा है। सिविल सर्जन ने कहा कि जिस वक्त DS को सरकारी अस्पताल में ड्यूटी पर होना चाहिए था, उस वक्त वे अपने आवास पर निजी व्यवस्था देख रहे थे। उन्होंने पूरे घटनाक्रम का वीडियो बनाकर उच्चाधिकारियों को कार्रवाई के लिए भेज दिया है।
DS ने आरोपों को बताया बेबुनियाद, कहा- 24×7 रहती है ड्यूटी
छापेमारी पर कड़ा ऐतराज जताते हुए DS डॉ. देवेश कुमार ने सिविल सर्जन के आरोपों को पूरी तरह निराधार करार दिया है। उन्होंने कहा कि उनकी गैर-मौजूदगी में आकर इस तरह छापेमारी करना गलत है। उन्होंने दावा किया कि वे पिछले एक साल से DS के पद पर हैं और उनका बेहतरीन परफॉर्मेंस ही उनके काम का प्रमाण है। ड्यूटी के समय पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा कि बतौर DS उनकी ड्यूटी महज 6 घंटे की नहीं बल्कि 24 घंटे की होती है और उन्हें रात के समय भी अस्पताल से जुड़ी समस्याओं को निपटाना पड़ता है। स्वास्थ्य विभाग के दो शीर्ष अधिकारियों के बीच छिड़ी इस खुली जंग से पूरे जिले के प्रशासनिक गलियारों में हलचल मच गई है।


