
Bokaro: बोकारो के सबसे व्यस्त कारोबारी इलाके सिटी सेंटर सेक्टर-4 की सड़कें शुक्रवार को रोजाना की तरह गुलजार थीं। दुकानदार अपने रोज़मर्रा के काम में जुटे थे कि तभी BSL के सुरक्षा विभाग की टीम अचानक वहां आ धमकी। बिना किसी संभलने के मौके के, दुकानों के बाहर गलियारे में बने निर्माण पर अचानक हथौड़े चलने लगे। चंद मिनटों में दुकानों के आगे मलबे का ढेर लग गया और व्यापारियों का गुस्सा फूट पड़ा। देखते ही देखते यह पूरी कार्रवाई एक बड़े प्रशासनिक विवाद में बदल गई।

उपायुक्त से मिले आक्रोशित व्यापारी
कार्रवाई से नाराज व्यापारी शनिवार को एकजुट होकर सीधे बोकारो के उपायुक्त अजय नाथ झा के दफ्तर पहुंचे। दुकानदारों का आरोप था कि BSL प्रबंधन की ओर से उन्हें संभलने या सामान हटाने का कोई उचित नोटिस नहीं दिया गया और सीधे तोड़फोड़ शुरू कर दी गई। व्यापारियों ने उपायुक्त के सामने अपनी बात रखते हुए इस मनमानी कार्रवाई पर नाराजगी जताई और निष्पक्ष जांच की मांग की।

सीलिंग का था निर्देश, तो फिर हथौड़ा किसने चलाया?
व्यापारियों की शिकायत सुनने के बाद उपायुक्त के बयान ने इस पूरे मामले को और ज्यादा पेचीदा बना दिया। DC अजय नाथ झा ने साफ किया कि प्रशासन की तरफ से अतिक्रमण हटाने के लिए दुकानदारों को पहले तीन नोटिस जारी करने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद भी कब्जा न हटने की स्थिति में दुकानों को सील करने का आदेश था, न कि किसी तरह की तोड़फोड़ करने का। DC के इस बयान के बाद अब पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं कि जब प्रशासनिक आदेश सिर्फ सीलिंग का था, तो फिर दुकानों पर हथौड़ा चलाने का फैसला किसका था?
पार्किंग और फूड स्ट्रीट को लेकर भी हुई चर्चा
बातचीत के दौरान सिटी सेंटर इलाके में अक्सर लगने वाले जाम और पार्किंग की समस्या पर भी चर्चा हुई। उपायुक्त ने व्यापारियों को सुझाव दिया कि वे दुकानों के सामने की व्यवस्था को खुद भी बेहतर बनाएं। उन्होंने फूड स्ट्रीट के जरिए दुकानों और गाड़ियों की पार्किंग को सही तरीके से व्यवस्थित करने की बात कही। फिलहाल हर किसी की नजर इस बात पर टिकी है कि अपने सुरक्षा विभाग की इस कार्रवाई पर BSL प्रबंधन क्या स्पष्टीकरण देता है और प्रशासन आगे क्या कदम उठाता है।


