
Ranchi: बिहार से कैडर बंटवारे के बाद झारखंड आए सचिवालय सेवा के अधिकारियों की वरीयता (Seniority) सूची में बड़ा संशोधन किया गया है। राज्य के कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग ने 9 अक्तूबर को इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी किया है। इसके तहत विभाग ने संशोधित औपबंधिक वरीयता सूची जारी करते हुए प्रभावित अधिकारियों से सात दिनों के भीतर अपनी-अपनी दावेदारी या आपत्ति दर्ज कराने को कहा है।

कार्यरत और सेवानिवृत्त दोनों अफसरों को 7 दिन का मौका
कार्मिक विभाग के आदेश के अनुसार, इस बदलाव से प्रभावित होने वाले वर्तमान में कार्यरत (Serving) और सेवानिवृत्त (Retired) दोनों श्रेणियों के अधिकारी अपनी सिनियोरिटी को लेकर सात दिनों के भीतर अपना दावा पेश कर सकते हैं। इसके लिए अधिकारियों को अपने दावों के समर्थन में संबंधित आवश्यक दस्तावेजों के साथ कार्मिक विभाग में आवेदन जमा करना होगा।

म्यूचुअल ट्रांसफर से आए अफसरों की सिनियोरिटी में बड़ा बदलाव
विभागीय आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि कैडर का अंतिम बंटवारा होने के बाद जो कर्मचारी या अधिकारी आपसी सहमति (Mutual Transfer) से बिहार से स्थानांतरित होकर झारखंड आए हैं, उन्हें उनकी मूल (Parent Cadre) वरीयता का लाभ नहीं दिया जाएगा। ऐसे कर्मचारियों को झारखंड में संबंधित श्रेणी या बैच में अपने समान स्तर पर नियुक्त कर्मियों की तुलना में सबसे कनिष्ठ (Junior-most) माना जाएगा।
2011 के आदेश में संशोधन, कोर्ट के फैसलों को बनाया गया आधार
विभाग ने यह साफ किया है कि वर्ष 2011 में जारी की गई वरीयता सूची में यह आंशिक संशोधन अदालतों (High Court / Supreme Court) द्वारा दिए गए विभिन्न आदेशों और कानूनी दिशा-निर्देशों को आधार बनाकर किया गया है। सात दिनों की मियाद पूरी होने और आपत्तियों के निस्तारण के बाद विभाग अंतिम वरीयता सूची का प्रकाशन करेगा।


