
सुपौल: बेटी के जन्म पर जश्न की ऐसी तस्वीर समाज को खूबसूरत संदेश देती है। बिहार के सुपौल जिले के राघोपुर प्रखंड अंतर्गत दहगामा गांव में नवरात्र के पहले दिन एक मजदूर परिवार में बेटी का जन्म हुआ। परिवार ने इस खुशी को खास अंदाज में मनाया। अस्पताल से नवजात बच्ची को फूल-मालाओं से सजी गाड़ी में गाजे-बाजे के साथ घर लाया गया। इस दौरान पटाखे भी जलाए गए। परिवार के इस अनोखे स्वागत की चर्चा गांव में हो रही है।

नवरात्र में बेटी के जन्म से दोगुनी हुई खुशियां
नवरात्र के पहले दिन देशभर में मां दुर्गा की आराधना की जा रही थी। इसी शुभ अवसर पर दहगामा गांव के विद्यानंद मुखिया के घर पहली बेटी ने जन्म लिया। परिवार के लिए यह पल बेहद खास बन गया।

एक ओर मां दुर्गा की पूजा-अर्चना का माहौल था, तो दूसरी ओर घर में नन्ही बच्ची के आने की खुशी। परिजनों ने बेटी के जन्म को किसी त्योहार की तरह मनाने का फैसला किया और उसके स्वागत के लिए खास तैयारियां कीं।
फूलों से सजी गाड़ी में हुआ नन्ही बच्ची का स्वागत
बेटी के जन्म को यादगार बनाने के लिए परिजनों ने अस्पताल से घर तक लाने के लिए एक गाड़ी को फूल-मालाओं से सजवाया। दुल्हन की तरह सजी गाड़ी में बच्ची को घर लाया गया। इस दौरान डीजे की धुन, गाजे-बाजे और पटाखों के बीच उसका स्वागत किया गया।
परिवार के इस उत्साह ने माहौल को खुशियों से भर दिया। बच्ची के जन्म पर इस तरह का जश्न मनाकर परिजनों ने यह संदेश दिया कि बेटी का आना भी परिवार के लिए उतनी ही खुशी का अवसर है।
पंजाब में राजमिस्त्री का काम करते हैं विद्यानंद मुखिया
परिजन रामपुकार ने बताया कि विद्यानंद मुखिया पंजाब में राजमिस्त्री का काम करते हैं। नवरात्र के पहले दिन उनके घर पहली बेटी के जन्म से परिवार की खुशियां दोगुनी हो गईं।
परिजनों ने बच्ची को देवी का रूप मानते हुए उसका भव्य स्वागत किया। धार्मिक आस्था और परिवार में नए सदस्य के आगमन की खुशी ने इस अवसर को और खास बना दिया।
बेटी के जन्म पर जश्न मनाकर दिया समानता का संदेश
ग्रामीण छोटेलाल रजक ने कहा कि आज भी समाज के कई हिस्सों में बेटा और बेटी के बीच भेदभाव देखने को मिलता है। ऐसे में दहगामा गांव के इस परिवार ने बेटी के जन्म को उत्सव की तरह मनाकर एक सकारात्मक संदेश दिया है। बेटी किसी परिवार पर बोझ नहीं, बल्कि प्यार, सम्मान और उम्मीदों की हकदार है।
वहीं, परिजन सुरेंद्र कुमार रजक ने कहा कि बेटियों के सम्मान और समानता की बात करना ही काफी नहीं है। जब कोई परिवार बेटी के जन्म को इस तरह उत्सव बनाकर मनाता है, तो यह अपने आप में समाज के लिए एक संदेश बन जाता है।
बेटियां भी हैं परिवार की शान
नवरात्र के पावन अवसर पर बेटी के जन्म का यह जश्न क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। परिवार का यह कदम याद दिलाता है कि बेटियां भी घर की रौनक, परिवार की मुस्कान और भविष्य की उम्मीद होती हैं।
बेटे और बेटी के जन्म पर समान खुशी और सम्मान देना ही बराबरी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। दहगामा गांव के इस परिवार ने नन्ही बच्ची का भव्य स्वागत कर इसी सोच को सामने रखा है।
(रिपोर्टर: कुंदन कुमार, सुपौल)


